काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |
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आखिर में खतम हो ही गए, वो रिश्ते उन लोगों से जिन्हे मिलके ये लगा था, की ये लोग जिन्दगी भर साथ देंगे |
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छोङ देता, लेकिन जीत मेरी जिद है, और जिद का मै बादशाह हूँ..
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तेरे पास जो है उसकी कदर कर , यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
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जरुरी तो नहीं हर पल तेरे पास रहू मोहब्बत और इबादत दूर से भी की जाती है
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आँखों में देखी जाती हैं.. प्यार की गहराईयाँ...शब्दों में तो छुप जाती हैं.. बहुत सी तन्हाईयाँ....
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'देख ली हमने जमाने की यारी मतलब निकल जाने के बाद दूर हो जाते है बारी बारी।" ?
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बेशक थोड़ा इंतजार मिला हमको, पर दुनिया का सबसे हसीं यार मिला हमको, न रही तमन्ना अब किसी जन्नत की, तेरी दोस्ती में वो प्यार मिला हमको
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हैसियत का कभी अभिमान न करना उड़ान ज़मीं से शुरू और जमीं पे ही ख़त्म होती है ?
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अपने सपनो को सफल बनाने के लिए बातों से नही , रातों से लढना पड़ता है।
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अपनी मर्जी से भी दो चार कदम चलने दें ऐ-जिन्दगी, तेरे कहने पे तो बरसों चलें हैं..?
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कभी वक़्त मिले तो सोचना जरुर, वक़्त और प्यार के अलावा तुमसे माँगा ही क्या था।?
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अल्फ़ाज़ के कुछ तो कंकर फ़ेंको, यहाँ झील सी गहरी ख़ामोशी है।”
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टूटी चीज़े हमेशा परेशान करती है, जैसे दिल, नींद, भरोसा और सबसे ज्यादा किसी से उम्मीद..
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जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले लौट कर सिर्फ यादें आती हैं वक़त नहीं
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प्यार वही हैं ... जो दूर रहकर भी महसूस होता हैं
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सारी शिकायतों का हिसाब जोड़कर रखा था मैंने… उसने गले लगाकर सारा हिसाब ही बिगाड़ दिया ❤
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एक सच्चा रिशता कुछ भी नहीं मांगता वक्त और इज्जत के सिवा
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कौनसा अंदाज़ है ये?तेरी महोब्ब्त का?, ज़रा हमको भी समझा दे…मरने से भी रोकते हो, और जीने भी नहीं देते..!!
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सुरत तो फिर भी सुरत है.. मुझे तो तेरे नाम के लोग भी अच्छे लगते है!!?
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हम उनसे तो लड़ लेंगे जो खुले आम दुश्मनी करते हैं... लेकिन उनका क्या करे जो लोग मुस्कुरा के दर्द देते हैं...
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मुस्कुराने की आदत डालो क्यों की रुलाने वालो की कमी नहीं हैं..
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जहर की जरूरत नहीं इश्क में, नजर अंदाजी से ही मर जाएंगे..!!
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अकेले रोना भी क्या खूब कारीगरी है ! सवाल भी खुद के होते है और जवाब भी खुद के ..
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आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की , हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की
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दर्द को भी आधार कार्ड से जोड़ दो जनाब, जिन्हे मिल गया हो, उन्हे दोबारा ना मिले.
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मै ज़िंदगी गिरवी रख दुंगा, तु सीर्फ कीमत बता मुस्कुराने की.
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हम तो बस जरूरत थे, जरूरी तो कोई और था | ?
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गुनाह छोटा हो या फिर बड़ा हिसाब सबका होता है..!
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