लौटना मत भूल के भी, इश्क़ से नफरत हो चुकी है अब।??
Copy
91
गिरे हुए लोगों को उठाना नही ? भूलना सीखो। ??
Copy
42
नफरत के बाज़ार में जीने का अलग ही मज़ा है, लोग रुलाना? नहीं छोड़ते हम हसना? नहीं छोड़ते….!!
Copy
125
चुप हूँ तो चुप ही रहने दो मुझे, अगर बोल पड़ा तो काफी चेहरों को नफरत हो जाएगी!?
Copy
108
“रास्ते मुश्किल है पर हम मंज़िल ज़रूर पायेंगे ये जो किस्मत अकड़ कर बैठी है इसे भी ज़रूर हरायेंगे।”?
Copy
153
मुझे अब महफिलों में लौट कर आना पड़ेगा, फर्क होता है बाप और बेटे में, बताना पड़ेगा।?
Copy
25
नाम एक दिन में नहीं बनता, लेकीन एक दिन जरूर बनता है। ?
Copy
20
तुम्हीं से सीख रहा हूं हुनर नजर अंदाजगी का, अब जो तुम पर आजमाऊं तो बेवफ़ा मत समझना |??
Copy
64
गुनाह छोटा हो या फिर बड़ा हिसाब सबका होता है..!
Copy
18
शरम उन्हें आती है, जो शरम से शरमाते है, हम तो बेशरम है, साला शरम खुद हमसे शरमाती है..
Copy
50
सहारे ढूढ़ने की आदत नहीं हमारी, हम अकेले पूरी महफ़िल के बराबर हैं।
Copy
50
तुम बदलकर तो देखो , हम पलटकर भी न देख़ेगे।।
Copy
73
एक तमन्ना थी कि ज़िन्दगी रंग बिरंगी हो और दस्तूर देखिए, जितने मिले गिरगिट ही मिले | ❤️
Copy
27
बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं, अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती |?
Copy
73
हमारे जैसे बनने की कोशिश मत करो शेर ? पैदा होते हैं बनाये नहीं जाते !
Copy
71
जिन्दगी बहुत छोटी सी है, इसलिये मैं घमंड नहीं बल्कि शौक रखता हूँ..
Copy
69
जिंदगी इतनी मुश्किल इसीलिये हैं, क्योंकि लोग आसानी से मिली चीज़ों की कद्र नहीं करते..
Copy
20
तू चालाकी से कोई चाल तो चल, जीतने का हुनर मुझ में आज भी हैं ! ?
Copy
22
तू मेरी नक़ल तो कर लेगा, लेकिन बराबरी कैसे करेगा..!!?
Copy
60
खामोश था मैं ? तुमने कमजोर समझ लिया?
Copy
76
रफ़्तार मेरी धीमी ही सही, मगर उड़ान ? जरूर लंबी होगी..!
Copy
52
नफरत का रिश्ता भी नही रखना तुमसे, वो रिश्ता भी निभा सको इस काबिल नही तुम।??
Copy
62
नाम की दोस्ती काम की यारी दूसरो की तरह ये आदत नहीं हमारी |❤️?
Copy
142
आग ? लगाने वालों को कहा खबर, रुख हवा ?️ ने बदला तो राख वो भी होगे..!
Copy
119
फितरत में ही नहीं है हर किसी का हो जाना, वरना न प्यार कि कमी थी न प्यार करने वालों की❤️?
Copy
64
शराफत की दुनिया का किस्सा खतम, अब जैसी दुनिया वैसे हम |
Copy
160
काम ऐसा करो की नाम हो जाए, या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए| ??
Copy
133
मेरी सोच और मेरी पहचान, दोनों ही तेरे औकात से बाहर है!
Copy
20
तुम जलते रहोगे आग ? की तरह, और हम खिलते रहेंगे गुलाब की तरह| ?
Copy
135
खेल खेलने में तभी मजा आता हैं, जब जिंदगी दाव पर लगी हों. ?
Copy
68