जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
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मुझे फरक नहीं पड़ता,,,,अब क़समें खाओ या जहर..!!
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शिकायत जिन्दगी से नहीं , उनसे है जो जिन्दगी में नहीं है .
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जनाब तुम महोबत की बात करतें हो हमनें तो दोस्ती मैं भी धोखे खाये हैं।
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पढ़ना लिखना त्याग, नक़ल से रख आस, ओढ़ रजाई सो जा बेटा, रब करेगा पास
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आ बैठ मेरे मालिक आज बटवारा कर ही लें, सारी दुनिया तेरी और सिर्फ तूं मेरा |
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दुश्मन चाहे कितने भी हो पर दोगला यार एक भी न हो |?
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कई बार ऐसा भी होता है के ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी इंसान की खुशियां छीन लेता है।
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तेरे पास जो है उसकी कदर कर , यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
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क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
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हौसले ? का सबूत देना था, इसलिए ठोकर खाकर भी मुस्कुरा ? पड़े.
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मैं ख़ुशी तलाश कर रहा था और मुझे तुम मिल गए |
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जब शिकार का वक़्त होगा, तब हम जंगल जरुर आयेगें! ?
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न कोई चेला न कोई मेला, मन मिले तो मिल जाओ मुझसे , वरना शिव भक्त चले अकेला || बम बम भोले ||
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किस्मत सिर्फ मेहनत करने से बदलती है बैठ कर सोचते रहने से नहीं
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रिश्ता दिल में होना चाहिए शब्दों में नहीं और नाराजगी शब्दों में होनी चाहिए दिल में नहीं।
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जिसे पा नहीं सकते, यह जरूरी नहीं कि उसे प्यार करना भी छोड़ दिया जाए...
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जख्म इतने थे दिल पर कि, हकीम ने ईलाज में मौत ही लिख दी
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मुझे पसंद है शांत रहना, इसे मेरी 'कमजोरी' मत समझना ।
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चोट का गहरा होना लाजमी था, वार जो अपनो का था |?️
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गिरगिट की आखिरी जुबान “में आजकल रंग बदलने में लोगों का मुकाबला नहीं कर पा रही हूं
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शौंक से नहीं किया कौइ गुनाह,, लोग हर बार औंकात पुछ रहे थे..!??
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अपनापन छलके जिस की बातों में .. सिर्फ़ कुछ ही बंदे होते है लाखों में
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घुटन सी होने लगी थी, इश्क़ जताते जताते हम खुद से रूठ गए थे किसी को मनाते मनाते।।??
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ना जाने किस बात पे वो नाराज हैं हमसे, ख्वाबों मे भी मिलता हूँ तो बात नही करती..!?
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क्यों सवरू मैं किसी के लिए, जब बिखरी झुलफो में तुम मुझे ख़ूबसूरत कह देते हो ❤
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जगह देनी है तो अपनी रूह में दे दो.. यूँ दिलों में तो, बहुतों के बसते हैं हम.?
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आज फिर उसने मुस्कुराके देखा मेरी तरफ और मैं फिर से दीवाना हो गया।।
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शोर सी है जिंदगी मेरी, सुकून सा है इश्क तेरा!!
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कभी फुर्सत हो तो इतना जरूर बताना, वो कौन सी मोहब्बत थी जो हम तुम्हें ना दे सके.
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