ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए , मुझे बस तेरी एक झलक चाहिए
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एक अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा जहाँ लोग मिलते कम, झाँकते ज्यादा है..!
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हजारो चेहरों में उसकी झलक मिली मुझको.. पर. दिल भी जिद पे अड़ा था कि अगर बो नहीं , तो उसके जैसा भी नहीं।
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वो भी बात करते है कदर की , जो खुद किसी की कदर नहीं करते...
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साथ मेरे बैठा था, पर किसी और के करीब था , वो मेरा अपना सा लगने वाला किसी और का नसीब था।।??
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खूबसूरत तो मुझे वो बाद में लगी, पहले तो मुझे मोहब्बत हुई थी.
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बहुत याद आते हो तुम , दुआ करो मेरी यादाश्ति चली जाये
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लगता है जिंदगी आज कुछ ख़फ़ा हैj, चलिए छोड़िए कौन सी पहली दफ़ा है|?
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मिलना है जो गैरों से तो साफ ही कह दो, यूं रूठ के जाने का बहाना अच्छा नहीं लगता
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तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है..
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ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है..तो मेरा लहू लेले....यू कहानिया अधूरी न लिखा कर।
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देखी है दरार आज मैंने आईने में..पता नहीं शीशा टुटा हुआ था या फिर मैं ?
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सफर बहुत कठिनाई से भरा था, तुमने हाथ थामा और खूबसूरत हो गया.!
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मेरे पास'कमीनों की फौज है, तभी तो जिंदगी में मौज है।
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अजीब अंदाज़ है मेरे महबूब की मासूमियत का, मैं तस्वीर में भी देखूँ तो वो पलकें झुका लेती है |??
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आज़ाद कर दिया हे हमने भी उस पंछी को …,जो हमारी दिल की कैद में रहने को तोहीन समजता था ..।
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जाने का कोई इरादा नहीं था, पर रुककर भी क्या करते, जब तू ही हमारा नहीं था ?
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ख्वाब ख्वाइश और लोग जितने कम हो उतना अच्छा है..!!
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मुझे छोड़ने की वजह तो बता देते मुझसे नाराज़ थे या मुझ जैसे हज़ार थे
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इश्क का धंधा ही बंद कर दिया साहेब, मुनाफे में जेब जले, और घाटे में दिल..!!??
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सोचता रहा ये रातभर करवट बदल बदल कर, जानें वो क्यों बदल गया, मुझको इतना बदल कर..!!?
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टूटे हुए सपनो और छुटे हुए अपनों ने मार दिया, वरना ख़ुशी खुद हमसे मुस्कुराना सिखने आया करती थी |?
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सच्चा प्यार ईश्वर कि तरह होता है, जिसके बारे में बातें तो सभी करते हैं लेकिन महसूस कुछ ही लोगों ने किया होता है
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जो भी पास था खो चुका हूँ, मैं सबका भला करके बुरा बन चुका हूँ मै..??
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तकलीफ़ अकेलेपन से नहीं, अंदर के शोर से है…??
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छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़ , कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़
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क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
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मुझे समझना है तो बस अपना समझ लेना क्यूकि हम अपनों का साथ खुद से ज्यादा निभाते हैं
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इन् तरसती निग़ाहों का ख़्वाब है तू, आजा के बिन तेरे बहुत उदास हूँ मैं..!!
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रफ़्तार मेरी धीमी ही सही, मगर उड़ान ? जरूर लंबी होगी..!
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