तकलीफ ये नहीं कि मोहब्बत हो गई थी दर्द ये है कि अब वो भुलाई नहीं जा रही |
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"खैरात में मिली ख़ुशी हमें पसंद नहीं, हम अपने ग़मो में भी रहते हैं नवाबो की तरह !!"
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कितना खुश था कभी मैं खुद की ही दुनियाँ में..... ये गैरों की मोहब्बत ने मुझे तबाह कर दिया।
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छोङ देता, लेकिन जीत मेरी जिद है, और जिद का मै बादशाह हूँ..
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अजनबी कहें की अपना कहें …अब क्या कहें, क्या ना कहें …
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सफाईया देनी छोड दी मैंने सीधी सी बात है.. बहुत बुरा हूँ मैं..
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"तुम" याद आओगे यकीन था मुझे, इतना आओगे अंदाजा नहीं था...!
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कुछ तो सोचा होगा किस्मत ने तेरे मेरे बारे मैं, वरना इतनी बड़ी दुनिया में तुमसे ही मोहब्बत क्यों हुई
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मोहब्बत को धोखा दोस्ती को प्यार मानता हु जो भी भाई बोल दे उसे जिगरी यार मानता हु
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ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है
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खुशियाँ दिखावे की हो सकती हैं, जनाब ग़म तो छुपाने से भी नहीं छुपता है|
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जितना तुझे किसी ने चाहा भी न होगा उतना तो मैंने सिर्फ तुझे याद किया है
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बस यूं ही थम के रहे गया कारवां दिल का, हम कहे नहीं पाए उन ने सुनना नहीं चाहा!
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पैदा तो हम भी शरीफ हुए थे, पर शराफत से अपनी कभी बनी ही नहीं?
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आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
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घुटन सी होने लगी थी, इश्क जताते जताते, हम खुद से रूठ गए थे, किसी को मनाते मनाते |?
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नहाए धोए से हरी मिले तो मै नहाऊं सौ बार हरि तो मिले निर्मल हृदय से प्यारे मन का मैल उतार |
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लक तो हर किसी का है यार, पर हमे पाने के लिये लक नहीं गुड लक चाहिये ?
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शौक पूरे करो जिंदगी तो, एक दिन खुद पूरी हो जाएगी..!!?
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भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाती है,और दूसरों पर रखो तो कमजोरी !
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कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न
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जो हमे समझ ही नहीं सका, उसे हक है हमें बुरा समझने का।?
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दिल में चाहत का होना जरूरी है…वरना, याद तो रोज दुश्मन भी करते हैं.?
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ख्वाहिश थी उस रिश्ते को बचाने की… और बस इक यही वजह थी मेरे हार जाने की…
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नाम तेरा ऐसे लिख चुके है अपने वजूद पर, कि तेरे नाम का भी कोई मिल जाए…तो भी दिल धड़क जाता है..??
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अगर फितरत हमारी सेहने की ना होती, तो हिम्मत तुम्हारी कुछ कहने की ना होती?
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अकेले ही गुज़रती है ज़िन्दगी, लोग तसल्लियाँ तो देते हैं, पर साथ नहीं।?
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शीशे की तरह साफ़ हूँ फिर भी न जाने क्यू अपनों की समझ से बाहर हूँ..?
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बिन धागे की सुई सी बन गई है ये ज़िंदगी, सिलती कुछ नहीं, बस चुभती चली जा रही है…?
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पढ पढ के हो गया BORE और उपर से ऐ KATRINA ,केह रही है तेरी Ore तेरी Ore.
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