दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो, वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं….!!
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उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है
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इंसान सबसे ज्यादा ज़लील अपनी पसंद के लोगों से ही होता है |
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क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
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मसला तो सिर्फ अहसासों का है जनाब, रिश्ते तो बिना मिले भी सदियां गुजार देते है.
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वो तुम्हे डोमिनोस के लिए कहेगी लेकिन तुम भंडारे पर अड़े रहना
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दुश्मनी मंजूर है साहब, किसी के तलवे चाटना हमारे उसुलो के खिलाफ है |??
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मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी
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इश्क़ की बात न करो जनाब जले बैठे हैं, खामखा गाली दे देंदे |?
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जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....
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ईमानदारी से कर्म करने वालों के शौक भले ही पूरे ना हो पर नींद जरूर पूरी हो जाती है .
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दिलो जान से करेंगे हिफ़ाज़त तेरी,बस एक बार तू कह दे कि मैं अमानत हूं तेरी…
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जिसकी सज़ा सिर्फ़ तुम हो मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है..❤️❤️
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कभी-कभी कुछ रिश्तों से बाहर आ जाना ही अच्छा होता है, EGO के लिए नही, SELF-RESPECT के लिए...
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कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है,बस कोई दिल से नहीं मिलता
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उनकी जब मर्जी होती है तब हमसे बात करते हैं, और हम पागल पूरा दिन उनकी मर्जी का इंतज़ार करते हैं|
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दोस्ती ऐसी होनी चाहिए लोग देखते ही बोले आ गए दोनों आज जाने कोनसा कांड करेंगे
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प्यार की गहरायी की सीमा तब पता चलती है, जब बिछुड़ने का समय होता है
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हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था
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कुछ पाने के लिए कुछ खोना नहीं..कुछ करना पड़ता है
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तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
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ज़िंदगी में मोहबत का पौधा लगाने से पहले ज़मीन परख लेना, हर एक मिटटी की फितरत में वफ़ा नहीं होती दोस्तो !!
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गिरे हुए लोगों को उठाना नही ? भूलना सीखो। ??
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उनकी ख़ुशी ढूँढ़ते - ढूँढ़ते, मेरे ख्याब ने खुद ख़ुशी कर ली |
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“एक बार उसने कहा था मेरे सिवा किसी से प्यार ना करना, बस फिर क्या था तबसे मोहब्बत की नजर से हमने खुद को भी नहीं देखा
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जिन्दगी जीते है हम शान से, तभी तो दुश्मन जलते है हमारे नाम से. ?
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एक तो मेरा एकलौता प्यार.... ऊपर से तेरे नखरे
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खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।
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साथ मेरे बैठा था, पर किसी और के करीब था , वो मेरा अपना सा लगने वाला किसी और का नसीब था।।??
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मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की..कोई आप सा तो हो, लेकिन किसी और का ना हो..
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