मुझमें अपनी मुश्क मिला दी, फिर दुनिया रंगीन बना दी। मुझको अपनी सांसें कहकर, तुमने मेरी जान बचा दी।
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सच कहा था किसी ने कि तन्हाई में जीना सीख लो मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है |
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दिलों की बात करता है, जमाना, पर मोहब्बत आज भी, चेहरे से शुरू होती है |?
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गायत्र्येव परो विष्णुर्गात्र्येव परः शिवः ।गायत्र्येव परो ब्रह्मा गायत्र्येव त्रयी ततः ॥
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कुछ हार गई तकदीर कुछ टूट गये सपने, कुछ गैरों ने किया बरबाद कुछ भूल गये अपने..!!?
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दुश्मन चाहे कितने भी हो पर दोगला यार एक भी न हो |?
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मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है... मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं
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छड्ड दे फिकरा कल दिया, तूं हस के अज गुज़ार, कल जो होना होके रहना, आपे भली करू करतार वाहेगुरु जी
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हाथ में घड़ी ⌚ कोई भी बंदी हो… लेकिन वक़्त अपना होना चाहिए ?
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सिकंदर तो हम अपनी मर्जी से है, पर हम दुनिया नहीं दिल जितने आये हे।❤️?
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हम सादगी में झुक क्या गए, तुमने तो हमे गिरा हुआ समझ लिया |?
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मुझसे नफरत तभी करना जब मेरे बारे में सब कुछ जान जाओ, तब नहीं जब किसी से सुना हो।?
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46
प्यार पहला हो या दूसरा फर्क नहीं पड़ता बस प्यार सच्चा होना चाहिए |
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कई बार ये सोचके दिल मेरा रो ? देता है, की मुझे ऐसा क्या पाना था जो मैंने खुद को भी खो दिया |?
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कमज़ोर बदला लेते है मजबूत माफ़ करते है समझदार नज़रअंदाज़ करते है |❤️?
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अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।
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220
बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह, जिन्हें हद से ज्यादा वक़्त दिया जाता है..?
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नब्ज तो चल रही है आज भी मेरी पर, वो हकीम कहता है, मैं मर चुका हूं मोहब्बत में !
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ज़िन्दगी से यही सीखा है मेहनत करो रुकना नहीं हालत कैसे भी हो किसी के सामने झुकना नहीं
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तुमने ना सुनी धडकन हमारी पर हमने महसूस की सांस तुम्हारी
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मैं कैसे छोड़ दूं तुझे ऐ दोस्त. जब कोई नहीं था, तब तू ही तो था।??
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मंजिले कितनी भी ऊंची हो रास्ते हमेशा पैरों के नीचे होते हैं |
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काश तुम्हें भी पता होता, तुम्हारे बगैर दिन कितना बुरा गुजरता है.
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सब कुछ ठीक ही चल रहा है ना जाने क्यों उदास हु मैं
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जहाँ कोशिशों का कद बड़ा होता है, वहाँ नसीबों को भी झुकना पड़ता है. ?
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नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !
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बादशाह नहीं बाजीगर से पहचानते है लोग.. क्युकी हम रानियो के सामने झुका नहीं करते ❤️?
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"बादशाह नहीं बाज़ीगर से पहचानते हैं लोग हमें, क्योंकि हम रानियों के सामने झुका नहीं करते !!"
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भूल जाना तो जमाने की फितरत है, पर तुमने शुरुआत हमसे ही क्यों की.
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जिसके बदले तुम मिल जाओ, ऐसा कोई गुनाह करना चाहता हूँ.
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