नैन खुले तो दर्शन हो होठ खुले तो कीर्तन हो | याद रखु सतगुरु तेरे नाम को मन भटके तो सुमिरन हो ||
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नाम देने से कौन से रिश्ते सँवर जाते हैं...जहाँ रूह न बँधे दिल बिखर जाते हैं..
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बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में...इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं...!
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जब रिश्ते ही दम तोड़ चुके हों.... तो फिर प्यार, इजहार,गलती का अहसास ,सही गलत कुछ भी मैटर नहीं करता। ?
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आज फिर देखा किसीने मोहब्ब्त भरी निगाहों ? से.. एक बार फिर तेरी ख़ातिर हम ने अपनी नजरे ? झुका ली..!!
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जब पता है देने वाला छप्पड़ फाड़ कर देता है तो अम्बुजा सीमेंट से छत्त क्यों बनाये बैठे हो कहाँ से देगा ऊपर वाला
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प्रभु कहते है तुम किसी का कुछ मत बिगाड़ना , मैं तुम्हरा कुछ भी बिगड़ने नही दूंगा
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देख ली इस दुनिया की यारी बदल गए सब बारी बारी ! ?
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बुरे वक्त ⏱️ में भी किसी से कोई उम्मीद मत रखो, क्योकि समझौते शेर ? को भी कुत्ता ? बना देते है.
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प्यार की गहरायी की सीमा तब पता चलती है, जब बिछुड़ने का समय होता है
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भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाती है,और दूसरों पर रखो तो कमजोरी !
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सिर्फ़ मोहब्बत की होती तो भुला देते उन्हें, ये पागल दिल तो इबादत कर बैठा ?
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वक़्त बुरा हो तो मेहनत करना, वक़्त अच्छा हो तो किसी की मदद करना..!!
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आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की , हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की
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सीख जाओ वक्त पर किसी की चाहत की कदर करना, कहीं कोई थक ना जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते |❤️
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आँखों में देखी जाती हैं.. प्यार की गहराईयाँ...शब्दों में तो छुप जाती हैं.. बहुत सी तन्हाईयाँ....
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पास आकर सभी दूर चले जाते है अकेले थे हम, अकेले ही रह जाते है इस दिल का दर्द दिखाए किसे मल्हम लगाने वाले ही जख्म दे जाते है।
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छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़ , कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़
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जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
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तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
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उनकी जब मर्जी होती है तब हमसे बात करते हैं, और हम पागल पूरा दिन उनकी मर्जी का इंतज़ार करते हैं|
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न जाने क्या मासुमियत है तेरे चेहरे पर, तेरे सामने आने से ज्यादा तुझे छुपकर देखना अच्छा लगता है |??
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यहाँ तो खुद से ही मिले जमाना हो गया ... और लोग कहते है कि हमें भूल गये हो तुम ...
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नसीब का प्यार गरीब की दोस्ती, कभी धोखा नहीं देती हैं।
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क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये
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दिल पर लग जाती है उन्हें अक्सर हमारी बातें , जो कहते थे तुम कुछ भी बोलो बुरा नहीं लगता...
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सिर्फ जंगल ही छोडा है याद रखना शेर तो हम आज भी है |
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ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया
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प्यार वही हैं ... जो दूर रहकर भी महसूस होता हैं
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मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?
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