दिल लगाने से अच्छा है , पेड़ लगाऐ , वोह घाव नही कम से कम छाव तोह देगे
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दुश्मनी मंजूर है साहब, किसी के तलवे चाटना हमारे उसुलो के खिलाफ है |??
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सच्ची महोब्बत करने वाले इंसान के नसीब में सिर्फ तन्हाई लिखी होती है।
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चले जाएंगे तुझे तेरे हाल पर छोड़कर, कदर क्या होती है ये तुझे वक्त सिखा देगा ??
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किसी के पैरो मे गिरकर कामयाबी पाने से बेहतर है अपने पैरो पर चलकर कुछ बनने की ठान लो |
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हम तो बस जरूरत थे, जरूरी तो कोई और था | ?
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चुप रहना मेरी ताक़त है कमज़ोरी नहीं, अकेले रहना मेरी चाहत है,मजबूरी नहीं।
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ये बार बार छोड़ने का शौक तुम्हें ही था, हमनें तो पलके तक भिगोई थीं तुम्हें रोकने के खातिर.
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जाते वक्त बहोत गुरूर से कहा था उसने.... "तुम जैसे हजार मिलेंगे" मैंने मुस्कुरा कर कहा.... " मुझ जैसे की ही तलाश क्यों
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सच कहा था किसी ने कि तन्हाई में जीना सीख लो मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है |
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इंतजार तो मुझे,उस मौसम का है…. जहां पानी नहीं, तेरा इश्क़ बरसे..!
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बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए
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जीत कर दिखाओ उनको जो तुम्हारे हारने का इंतज़ार कर रहे हैं |?
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परेशान करते थे मेरे सवाल तुमको.. तो बताओ पसंद आयी खामोशी मेरी....
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हमें भी शौक था दरिया -ऐ इश्क में तैरने का, एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला.
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जगत पालनहार है माँ, मुक्ति का धाम है माँ, हमारी भक्ति का आधार है माँ, सबकी रक्षा की अवतार है माँ, शुभ नवरात्रि
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मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना, जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी.
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क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
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आपकी दोस्ती हमारे सुरों का साज है, आप जैसे दोस्त पर हमें नाज़ है, चाहे कुछ भी हो जाये जिंदगी में, दोस्ती कल भी वैसी ही रहेगी, जैसी आज है.
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छोड़ कर जाने वाले क्या जाने, यादों का बोझ कितना भारी होता है ?
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ना जाने कैसा रिश्ता है इस दिल का तुझसे, धड़कना भूल सकता है पर #तेरा नाम नही..? ?
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जब भी मैं तुमसे दूर होता हूँ, मुस्कुराते हुए तुम्हारे पुराने मेसेज और चिट्ठियां दोबारा दोबारा पढता हूँ ! हाँ ! तुमसे इतना प्यार करता हूँ मैं
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सवरने का तो सवाल ही नहीं उठता, हम तो बिखरे ही लाजवाब है,,!! ❤
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दो दिल मिल रहे हैं मगर चुपके चुपके
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काश तुम्हें भी पता होता, तुम्हारे बगैर दिन कितना बुरा गुजरता है.
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हमने तो अल्फ़ाजों में अपना दर्द सुनाया था उन्हें, मगर वो शायरी समझ कर, मुस्कुरा कर चले गए।
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जंग भीड़ से नहीं, जिगर से जीती जाती है.?
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तेरी मुहब्बत भी किराये के घर की तरह थी, कितना भी सजाया पर मेरी नहीं हुई.??
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जख्म देते हो फिर कहते हो सहते रहो, जान लेकर कहोगे जीते रहो.
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