कितनी झूठी है ना मोहब्बत की कसमे, देखो ना ! तुम भी जिन्दा हो, मै भी जिन्दा हुँ
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चले जाने दो उस बेवफ़ा को किसी और की बाहों में जो इतनी चाहत के बाद मेरा ना हुआ वो किसी और का क्या होगा
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किस किस का नाम लें, अपनी बरबादी मेँ; बहुत लोग आये थे दुआयेँ देने शादी मेँ !
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181
कोई अजनबी ख़ास हो रहा है,लगता है फिर प्यार हो रहा है…
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हमारे जीने का तरीक़ा थोड़ा अलग सा है, हम उम्मीद पर नहीं ज़िद्द पर जीया करते हैं !!"
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क्या खूब मजबूरियां थी मेरी भी.. अपनी खुशी को छोड़ दिया” उसे" खुश देखने के लिए ??
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तू मेरी नक़ल तो कर लेगा, लेकिन बराबरी कैसे करेगा..!!?
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दिल में फीलिंग्स का समुन्दर आता है जब आपका रिप्लाई एक मिनट के अंदर आता है
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निभा दिया उसने भी दस्तूर दुनिया का तो गिला कैसा पहचानता कौन है यहां मतलब निकल जाने के बाद...
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उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो, खर्च करने से पहले कमाया करो, ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे, बारिशों में पतंगें उड़ाया करो | ❤️?
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पास आकर सभी दूर चले जाते है अकेले थे हम, अकेले ही रह जाते है इस दिल का दर्द दिखाए किसे मल्हम लगाने वाले ही जख्म दे जाते है।
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उन्होंने पूछा तोहफे में क्या चाहिए, हमनें कहा वो मुलाकात जो कभी ख़त्म ना हो।
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दिलो जान से करेंगे हिफ़ाज़त तेरी,बस एक बार तू कह दे कि मैं अमानत हूं तेरी…
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जो बीत गया सो बीत गया…आने वाला सुनहरा कल है वो…..मैं कैसे भुला दूँ दिल से उसे… मेरी हर मुश्किल का हल है वो
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मसला पाने का होता तो ख़ुदा से छीन लेता ख़्वाहिश तुझे चाहने की है, उम्र भर चलेगी |
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जुनून सवार था किसीके अंदर ज़िंदा रहने का....हुआ यूं के हम अपने अंदर ही मर गये...
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बात कोई नहीं मानता, बात का बुरा सब मान जाते है...?
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ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…
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किसी के साथ रहो तो वफादार बन के रहो, धोखा देना गिरे हुए लोगों की पहचान होती है !
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रूठना भी छोड़ दिया है अब मैंने, उम्मीद नहीं कोई मनाने भी आयेगा।
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कैसी है मुहब्बत तेरी महफिल में मिले तो अनजान कह दिया !! सन्हा जो मिले तो जान कह दिया..
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अजनबी कहें की अपना कहें …अब क्या कहें, क्या ना कहें …
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तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी..और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!!!
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देर से बनो मगर जरूर कुछ बनो क्योकि वक़्त के साथ लोग खेरियत नहीं हैसियत पूछते है
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आज फिर उसने मुस्कुराके देखा मेरी तरफ और मैं फिर से दीवाना हो गया।।
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जीत हासिल करनी हो तो काबिलियत बढाओ, किस्मत की रोटी तो कुत्ते को भी नसीब होती है.?
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जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....
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अगर बाज़ ? की तरह उड़ना है.. तो कबूतरों का साथ छोड़ना पड़ेगा.!!?
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हम बुरे है इसमें कोई शक नहीं पर कोई बुरा कहे इतना किसी को हक़ नहीं ?
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बदल गए हैं हम क्युकी .. बात अब औकात पर आ गई है ..
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