इन आंखों की गुस्ताखी तो देखिए , तुम से आंखें मिलाने के बाद कुछ और देखने को राजी ही नहीं .
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यूँ ना छोड़ कर जाया करो बार-बार,अगर मैं रूठ गया तो,मेरी एक झलक को भी तरसोगी |
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कर्म भूमि की दुनिया में श्रम सभी को करना है भगवान सिर्फ लकीरें देता है रंग हमें ही भरना है | जय श्री कृष्णा
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बहुत कुछ कहा था तुझसे, लेकिन जब तुम हाल ना समझ सके तो बातें कहाँ से समझोगे।
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लाख साजिश करलो, हम कहकर हराने वालो में से हैं.!!
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कौन सा अंदाज़ है ये ? तेरी महोब्ब्त का?, ज़रा हमको भी समझा दे मरने से भी रोकते हो, और जीने भी नहीं देते..!!
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एक हार से कोई फकीर और एक जीत से कोई सिकंदर नहीं बनता..!!?
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तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है..
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लोग हमेशा गलत इंसान से धोखा खाने के बाद अच्छे इंसान से बदला लेते हैं
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बेशक तू बदल ले अपनी मौहब्बत लेकिन ये याद रखना,, तेरे हर झूठ को सच मेरे सिवा कोई नही समझ सकता!!
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एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।
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कभी मेरी नजरों से देख खुद को, खुद से मोहब्बत ना हो जाए. तो बेशक छोड़ देना मुझे ।।??
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हम थोड़े खामोश क्या हुऐ, कुछ लोगो ने तो हमे बेजुबां ही समझ लिया |❤️?
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वो जो कल रात चैन से सोया हैं , उसको खबर भी नहीं कोई उसके लिए कितने रोया हैं..
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होने दो जरा उन को भी तनहा.... याद हम भी उन्हें बेहिसाब आएंगे..
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दया होनी चाहिए कमजोरी नहीं, ज्ञान होना चाहिए अहंकार नहीं..!! ?
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ना होने का एहसास सबको है, मौजूदगी की कदर किसी को नहीं...?
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अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!
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खिलाफ कितने हैं फर्क नहीं पड़ता, जिनका साथ है लाजवाब है ! ?
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कमाल हैं ना ...? सांसे मेरी जिंदगी मेरी मोहब्बत मेरी , मगर जीने के लिये जरूरत तेरी
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मेरी दुआओं में शामिल तेरा ज़िक्र हर बार रहेगा, तुझे हो ना हो, मुझे तेरा इंतजार हर पल रहेगा ।?
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लोगो से कहदो हमारी तक़दीर से जलना छोड़ दें, हम घर से दौलत नहीं माँ की दुआ लेकर निकलते हैं
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खुद से थोड़ी वफ़ा कीजिए, जो ना मिले उसे दफा कीजिए!??
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दोस्ती ने एक बात अच्छी सिखाई, रास्ते बदलने से रिश्ते नहीं बदलते कभी..! ?
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बड़ी कश्मोकश है इन दिनो ज़िन्दगी में...किसी को ढूंढते फिर रहे हैं हर किसी में....
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यें वो जमाना है जिसकी जितनी परवाह करोगे,❤️ वो उतना ही बेपरवाह होकर मिलेगा ?
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मुझको क्या डराओगे मौत से मैं तो पैदा ही क़ातिलों की गली में हुआ हूँ। ?
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शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था
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बदला भी क्या लूं तुमसे ,,आज भी हंसते हुए अच्छे लगते हो ।
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आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
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