मत पूछ कैसे गुजर रही है जिंदगी , उस दौर से गुजर रहा हूँ जो गुजरता ही नहीं है
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56
घुटन सी होने लगी थी, इश्क़ जताते जताते हम खुद से रूठ गए थे किसी को मनाते मनाते।।??
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39
हम तो हँसते हैं दूसरों को हँसाने के लिए वरना ज़ख्म तो इतने हैं कि ठीक से रोया भी नहीं जाता..
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20
पैदा तो हम भी शरीफ हुए थे, पर शराफत से अपनी कभी बनी ही नहीं | ?
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12
तुने अच्छा ही किया मुझे गलत समझ कर, में भी थक गया हूँ खुद को साबित कर-कर के.
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20
अब तो वक्त ही उसे बतायेगा, की कितने कीमती थे हम !!
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381
प्यार ? मोहब्बत आशिकी ये बस अल्फाज थे मगर जब तुम मिले तब इन अल्फाजो को मायने मिले !!?
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23
बेशक किसीको माफ बार बार करो, लेकिन उसपर भरोसा एक ही बार करो..!??
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43
उसकी जीत के लिए उससे हार जाना , कमाल है ये एक तरफ़ा इश्क़ निभाना !
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8
आज भी लड़खड़ा जाती है आवाज़..जब कोई पूछता है तुम्हारे बारे में.. ❤️
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ठोकर खाया हुआ दिल है साहब भीड़ से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है.
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12
कैसे गुज़र रही है सब पूछते है , कैसे गुजारता हु कोई नहीं पूछता |
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मेरी हँसी को लोग ख़ुशी कहते हैं, पर किसी को नहीं पता कि इस ख़ुशी की वजह तुम हो ! ??
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घाटे और मुनाफे का बाज़ार नहीं, इश्क़ एक इबादत है, कारोबार नहीं..!!?
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गलतफहमी में ना रहना की जो लिखता हूँ तेरे लिए लिखता हूँ, क्यूँकि मेरे शब्द इतने सस्ते नही की तुझपे जाया करूँ।?
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82
तुमको भी कहाँ जरूरत है मेरी, तुम्हारे लिये तो मैं भी बिछड़ा हुआ जमाना हूँ.....!!
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मुझे छोड़ने की वजह तो बता देते मुझसे नाराज़ थे या मुझ जैसे हज़ार थे
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एक बार मेरी तरफ नज़रे उठा कर तो देखो, तमाम उम्र किसी और को नज़र उठा के देखु तो कहना।
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14
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
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दिल तक पहुँचने का रास्ता, वफ़ा के समंदर से होकर गुजरता है। हर लहर पे नाव बदलने वाले, मंजिल तक नही पहुँचा करते…
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9
बहुत डर लगता है उन लोगो से जो बातों में मिठास और दिलो में जहर रखते हैं |?
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हमको मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं, हमसे ज़माना है ज़माने से हम नहीं.?
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44
शराफत की दुनिया का किस्सा खतम, अब जैसी दुनिया वैसे हम |
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पैदा तो हम भी शरीफ हुए थे, पर शराफत से अपनी कभी बनी ही नहीं?
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सारी दुनिया के रूठ जाने से मुझे कोई दुख नहीं , बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है
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थोड़ी जगह दे दे मुझे तेरे पास कहीं रह जाऊं मैं खामोशियाँ तेरी सुनु ओर दूर कहीं ना जाऊं मैं
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ये जीवन है...साहब.. उलझेंगे नहीं, तो सुलझेंगे कैसे... और बिखरेंगे नहीं, तो निखरेंगे कैसे....?
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गुलाब तो नहीं दिया कभी हमने लेकिन, मोहब्बत गुलाब देने वालो से ज्यादा थी.
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30
अंदाजा ताकत का लगाया जाता है हौसले का नहीं।
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16
आपके प्यार में हम संवरने लगे ,देखके आपको हम निखरने लगे
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