अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!
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तेरे दिल के बाजार में मै रोज़ बिकती हुं , कुछ लफ्ज़ तेरी यादों के हर रोज़ लिखती हुं
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किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
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महसूस करके देखा महादेव हर पल मेरे साथ हैं दिखते नहीं कहीं पर सर पर उन्हीं का हाथ हैं
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माना की तू शेर है पर ज्यादा उछल मत, हम भी शिकारी हैं ठोक देंगे..!!?
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ज़िन्दगी में मंज़िले तो मिल ही जाती हैं ! लेकिन वो लोग नहीं मिलते जिन्हें दिल से चाहा हो ! ??
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मुस्कुराने के बहाने जल्दी खोजो वरना जिन्दगी रुलाने के मौके तलाश लेगी।
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तेरी एक कॉल की उम्मीद पे, मैने अभी तक अपना फोन नंबर नही
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इन्सान सब कुछ कॉपी ? कर सकता हैं, लेकिन किस्मत और नसीब नही...?
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स्टेटस पड़ने के अलावा कुछ और भी काम हैं के नहीं
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569
एक बार देखा था उसने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए, बस! इतनी सी हकीकत है, बाकी सब कहानिया है
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जहाँ सच✅ ना चले वहां झूठ❎ ही सही जहाँ हक? ना चले वहां लूट ही सही?
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सच्ची मोहब्बत एक जेल के कैदी की तरह होती हैं, जिसमे उम्र बीत भी जाए तो सजा पूरी नहीं होती |?❤️
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एक खूबसूरत सा रिश्ता यूँ खतम हो गया..हम दोस्ती निभाते रहे…..और उसे इश्क हो गया
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480
मेरे दर्द से वाकिफ नहीं अपनी खता मानता ही नहीं | क्या शिकायत करू उसे जो वफ़ा जानता ही |
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कल थे मिले,फिर क्यों लगे ऐसे… तुमसे मिले अरसा हुआ जैसे…
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रात के अंधेरे मे तो हर कोई किसी को याद कर लेता है सुबह उठते ही जिसकी याद आए मोहब्बत उसको कहते है
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अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं
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सहने की हिम्मत ? रखता हूं, तो तबाह ? करने का हौसला भी
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हजारो बार ली हैं तलाशियाँ तुमने मेरे दिल की, बताओ कभी कुछ मिला है तुम्हारे सिवा !
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कभी मिले फुर्सत तो इतना जरुर बताना वो कौनसी मोहब्बत थी जो हम तुम्हे ना दे सके
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अच्छी लगती है ये खामोशियाँ भी अब हर किसी को जवाब देने का सिलसिला ख़त्म हो गया।
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ज़रा सी वक़्त ने करवट क्या ली ! गैरों की लाइन में सबसे आगे अपनों को पाया हमने ?
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जिंदगी देने वाले , मरता छोड़ गये, अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये, जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की, वो जो साथ चलने वाले, रास्ता मोड़ गये”
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आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
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जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते, ये ख़त किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते |❤️?
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दोनों जानते है के, हम नहीं एक-दूसरे के नसीब में,फिर भी मोहब्बत दिन-ब-दिन बे-पनाह होती जा रही है..
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कैसे करूँ मैं तुम्हारी यादों की गिनती..... साँसों का भी कोई हिसाब रखता हैं क्या...
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कुछ खामोश कुछ गुमशुदा से हैं, हम आज तेरे बिन खुद से जुदा जुदा से हैं हम ??
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आंसू जानते है कौन अपना है इसलिए बस अपनों के सामने निकल आते हैं.
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