नफ़रत की एक बात अच्छी लगी मुझे, ये मोहब्बत की तरह झूठी नहीं है साहब !!?❤️
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सच्ची मोहब्बत एक जेल के कैदी की तरह होती हैं, जिसमे उम्र बीत भी जाए तो सजा पूरी नहीं होती |?❤️
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हमारी सोच और पहचान दोनो ही, तेरी’औकात’ से बाहर हैं। ??
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"उतर जाते है कुछ लोग दिल में इस कदर इन्हे दिल से निकालो तो जान निकल जाती है..."
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मोहब्बत कभी खत्म नही होती या तो बढ़ती है दर्द बनकर या फिर सुकून बनकर..।।
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जीत हासिल करनी हो तो क़ाबिलियत बढ़ाओ ! क़िस्मत की रोटी तो कुत्तों को भी मिला करती है !!"
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ज़िकर से नहीं फ़िक्र से पता चलता है कौन अपना है ❤️
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अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो
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तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी..और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!!!
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वक़्त बहुत कुछ छीन लेता है खैर मेरी तो सिर्फ मुस्कुराहट थी
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आखिर में खतम हो ही गए, वो रिश्ते उन लोगों से जिन्हे मिलके ये लगा था, की ये लोग जिन्दगी भर साथ देंगे |
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टूट सा गया है मेरी चाहत का वजूद ,अब कोई अच्छा भी लगे तो हम इज़हार नहीं करते?
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शादीशुदा लाइफ का मजा ही कुछ अलग...है ???? खाने को मिले या ना मिले, सुनने को भरपूर मिल जाता है...
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इश्क का समंदर भी क्या समंदर है... जो डूब गया वो #आशिक... जो बच गया वो #दीवाना... जो तैरता ही रह गया वह #पति
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मै तुमको भूल तो जाऊं मगर छोटी सी उलझन है.. सुना है... दिल से धड़कन की जुदाई मौत होती है ..!
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जितनी दफ़ा ज़िद्द हो मेरी...उतनी दफ़ा तू चाहिए!✨?
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बर्दास्त करू तो डरपोक, और सामना करू तो बतमीज..!
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जुदा होने का शौक भी पूरा कर लेना जनाब, लगता है तुझे हम ज़िंदा अच्छे नहीं लगते!?
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हैसियत का कभी अभिमान न करना उड़ान ज़मीं से शुरू और जमीं पे ही ख़त्म होती है ?
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कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न
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क्या खूब मजबूरियां थी मेरी भी.. अपनी खुशी को छोड़ दिया” उसे" खुश देखने के लिए ??
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तू उदास मत हुआ कर इन हज़ारो के बीच आखिर चांद भी तो तन्हा है सितारों के बीच
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धर्म की सबसे सरल व्याख्या किसी भी आत्मा को हमारी वजह से दुःख ना पहुँचे यही धर्म है.
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हल्दी लगाने की उम्र है मेरी और लड़कियाँ चुना लगा कर जा रही है
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कभी बेपनाह बरस पड़ी कभी गुम सी है, यह बारिश भी कुछ कुछ तुम सी है.
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जब बात जरूरत की हो तो जुबान सबकी मीठी हो जाती है।
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सफाईया देनी छोड दी मैंने सीधी सी बात है.. बहुत बुरा हूँ मैं..
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चुप रहना मेरी ताक़त है कमज़ोरी नहीं, अकेले रहना मेरी चाहत है,मजबूरी नहीं।
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वो शख्स एक छोटी सी बात पे यूँ चल दिया , जैसे उसे सदियों से किसी बहाने की तलाश थी .
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कभी आओ इस क़दर की आने में लम्हा और जाने में ज़िन्दगी गुज़र जाये
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