बदनाम तो केवल दारु है,वरना किडनी और लिवर तो मैगी ने ही ख़राब किये हैँ ।
Copy
100
दर्द सिर का हो या दिल का, दोनों बहुत बुरे होते है.
Copy
27
होती रहेगी मुलाकाते तुमसे, नजर से दूर हो दिल से नहीं ॥
Copy
114
अंदाज मुझे भी आता है, नज़र अंदाज करने का पर तू तक़लीफ़ से गुजरे ये मुझे गवारा नही |❤️
Copy
67
अगर पहले हम ये जन लें की हम कहाँ पर हैं और हम किस दिशा में जा रहे हैं, तो हमें क्या और कैसे करना चाहिए इसका बेहतर निर्णय कर सकते हैं
Copy
78
मत कोशिश करो मुझ जैसा बनने की क्योकि शेर पैदा होते हैं बनाए नहीं जाते ?
Copy
50
यूँ ना छोड़ कर जाया करो बार-बार,अगर मैं रूठ गया तो,मेरी एक झलक को भी तरसोगी |
Copy
7
जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाएं.. तो उन्हें आज़ाद कर देना चाहिए..?
Copy
104
कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम
Copy
34
कभी-कभी किसी से ऐसा रिश्ता भी बन जाता हैं...कि हर चीज से पहले उसी का ख्याल आता है
Copy
252
"बेबस कर दिया है , तूने अपने बस में करके......."
Copy
49
टूटे हुए सपनो और छुटे हुए अपनों ने मार दिया, वरना ख़ुशी खुद हमसे मुस्कुराना सिखने आया करती थी |?
Copy
68
किस्मत से लड़ने में मजा आ रहा है दोस्तों ! ये मुझे जीतने नहीं दे रही, और हार मैं मान नहीं रहा
Copy
639
"अकेले कैसे रहा जाता है , कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है
Copy
252
अरे कर्मों से डरिए ईश्वर से नहीं , ईश्वर माफ कर देता है कर्म नहीं
Copy
319
हम थोड़े खामोश क्या हुऐ, कुछ लोगो ने तो हमे बेजुबां ही समझ लिया |❤️?
Copy
33
जब भी तुम्हारा हौसला आसमान तक जाएगा याद रखना कोई ना कोई पंख काटने जरूर आएगा.
Copy
1K
हम घोड़े के ट्रिगर पे नही, बल्की खुद के जिगर पे जीते है..!?
Copy
49
प्यार पहला हो या दूसरा फर्क नहीं पड़ता बस प्यार सच्चा होना चाहिए |
Copy
24
तू छूट कर, क्यों छूटा नहीं ,कुछ तो जुदा है अभी ,मैं टूट कर, क्यों टूटा नहीं
Copy
88
क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..
Copy
35
जीवन मैं एक बार जो फैसला कर लो तो फिर पीछे मुड़कर मत देखना क्योंकि पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते
Copy
291
चाह कर भी उनका हाल नहीं पूछ सकते डर है कहीं कह ना दे कि ये हक्क तुम्हे किसने दिया
Copy
1K
अगर मैं लहर बनूं, तुम किनारा बनना अगर मैं बहक जाऊं तो तुम सहारा बनना |
Copy
21
तुम्हे तुमसे भी ज्यादा चाहने लगा हूँ, गुमसुम बैठे-बैठे मुस्कुराने लगा हूँ |
Copy
26
एक ख़्वाब था की वह भी मुझे चाहे मेरी तरह पर ख़्वाब ही रह गया
Copy
42
जिंदगी की उलझनों ? ने मेरी शरारतें कम कर दीं, और लोग समझते है कि मैं समझदार ? हो गया ।
Copy
59
मालूम है की ख़्वाब झूठे हैं और ख़्वाहिशें अधूरी हैं, पर ज़िंदा रहने के लिए कुछ गलतफहमियाँ भी ज़रूरी हैं |??
Copy
12
हुस्न का क्या काम सच्ची मोहब्बत में, रंग सांवला भी हो तो यार कातिल लगता है।❤️❤️
Copy
79