कौन सा अंदाज़ है ये ? तेरी महोब्ब्त का?, ज़रा हमको भी समझा दे मरने से भी रोकते हो, और जीने भी नहीं देते..!!
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शिकायतें नहीं करनी बस इतना सुन लो,,! मैं खामोश हूँ और वजह तुम हो,,! ??
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कभी कभी इंसान ना टूटता है ना बिखरता है बस हार जाता है कभी किस्मत से तो कभी अपनों से
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पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ..!
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किस तरह खत्म करें उन से रिश्ता, जिन्हें सिर्फ सोचते हैं तो पूरी कायनात भूल जाते हैं..!!
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उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो, खर्च करने से पहले कमाया करो, ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे, बारिशों में पतंगें उड़ाया करो | ❤️?
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वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
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प्रभु कहते है तुम किसी का कुछ मत बिगाड़ना , मैं तुम्हरा कुछ भी बिगड़ने नही दूंगा
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उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं हे , ये दिल उसका हे , अपना होता तो बात और होती
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अब वही होगा जो दिल चाहेगा, आगे जो होगा देखा जाएगा!?
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हर रोज तेरी यादों का हिसाब कर लेता हूं, मैं थोड़ा हंस लेता हूं; थोड़ा रो लेता हूं मैं ||
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प्यार का मतलब तो नहीं मालूम मुझे, मगर जब जब तुझे देखूँ दिल धड़कने लगता है।?
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किस्सा बना दिया उन लोगों ? ने भी मुझे जो कल तक मुझे अपना हिस्सा बताया करते थे | ?
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खुदा मेरे दुश्मनों को लम्बी उम्र दें ! ताकि वो मेरी क़ामयाबी देख सकें !!"
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मेरी मोहब्बत की कातिल मेरी ग़रीबी ठहरी उसे ले गए ऊँचे मकाँ वाले....!
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कर दिया न फिर से तन्हा, कसम तो ऐसे दी थी जैसे तुम सिर्फ मेरे हो !!
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क्यूँ नहीं महसूस होती उसे मेरी तकलीफ़ जो कहते थे बहुत अच्छे से जानते है तुझे
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मुझसे जब भी मिलो तो नज़रें उठा के मिला करो, मुझे पसंद है अपने आप को तेरी आँखों में देखना
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अपने ही हमें खुश नहीं देखना चाहते, तो गैरों से क्या शिकायत |??
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मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही,अब रातों को जागना अच्छा लगता है…
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उम्मीद हमे कभी भी छोड़ कर नहीं जाती बस हम ही उसे छोड़ देते है
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भीड़ तन्हाइयों का मेला है, यहाँ हर आदमी अकेला है |??
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मिलना तेरा मिलना मेरा …मिलना था क़िस्मत में लिखा…
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यदि आप सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती
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लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी. पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया..?
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तुम उसे छू लो और वो तुम्हारा हो जाए..इतनी वफा तो सिर्फ कोरोना के पास है ?
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इश्क ना सही फिकर है तू ना सही तेरा ज़िकर है |
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मैं अपने खिलाफ बाते अक्सर ख़ामोशी से सुनता हूं, जवाब देने का काम मैंने वक़्त को दे रखा है |?
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आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
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खैरियत पूछने वाले तो बहुत हैं मेरे पास ,, तलाश तो उसकी है जो खयाल भी रखे ।
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