बड़े बेताब थे वो मोहब्बत करने को हमसे, जब मैंने भी कर ली तो उन्होने शौंक बदल दिया.
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6
मैंने दबी आवाज में पूछा, मोहब्बत करने लगी हो, नजरें झुका कर वो बोली, "बहुत"
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65
नफरत के बाज़ार में जीने का अलग ही मज़ा है, लोग रुलाना? नहीं छोड़ते हम हसना? नहीं छोड़ते….!!
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125
कोई शिकायत अपने दिल में कभी नहीं रखना, यह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है
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63
मेरी बदमाशी का अंदाज़ा इससे लगाओ जब मैं ? शरीफ था तब भी लोग मुझे बदमाश ही कहते थे। ?
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18
खुबसूरत सा वो पल था, पर क्या करें वो कल था.?
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91
उम्मीद जिंदा रखिए साहेब, आज हँसने वाले कल तालिया भी बजाएंगे..!❤️?
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121
मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी
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45
सब छोड़ते ही जा रहे हैं मुझको ऐ ज़िन्दगी, तुझे भी इजाज़त है, जा जा के ऐश कर |
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9
सब कुछ पा लिया तुमसे इश्क़ करके बस कुछ रह गया तो वो तुम हो...??
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256
यहाँ तो खुद से ही मिले जमाना हो गया ... और लोग कहते है कि हमें भूल गये हो तुम ...
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42
बस जाते हैं दिल में इजाज़त लिए बगैर, वो जिन्हें हम ज़िन्दगी भर पा नहीं सकते |
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48
पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
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162
इश्क़ कभी झूठा नहीं होता, झूठे तो बस कसमे और वादे होते है !!
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35
क्या गिला करें उन बातों से क्या शिक़वा करें उन रातों से कहें भला किसकी खता इसे हम कोई खेल गया फिर से जज़बातों से
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13
भूलना भुलाना तो दिमाग का खेल है, बेफिक्र हो जाओ तुम तो दिल में रहते हो.
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175
तुम जलते रहोगे आग ? की तरह, और हम खिलते रहेंगे गुलाब की तरह| ?
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135
जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते हैं
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77
हम रोज़ उदास होते हैं और रात गुज़र जाती है एक दिन रात उदास होगी और हम गुज़र जाएंगे
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40
भीड़ तन्हाइयों का मेला है, यहाँ हर आदमी अकेला है |??
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73
मत हटाया करो यूँ दुपट्टे अपने चेहरे से, सीधा सा दिल मेरा बेइमान होने लगता है।
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24
धड़कनों को कुछ तो काबू में कर ऐ दिल अभी तो पलके झुकाई है मुश्कुराना बाकि है |
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23
ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
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17
जब अकेले चलने लगा, तब मुझे समझ आया, मैं भी किसी से कम नहीं हूं ?
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103
नींद चुराने वाले पूछते हैं सोते क्यों नहीं, इतनी ही फ़िक्र है तो फिर हमारे होते क्यों नहीं |
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6
पछतावा अतीत नहीं बदल सकता, और चिंता भविष्य..!!?❤️
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75
रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
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61
मेरी सोच और मेरी पहचान, दोनों ही तेरे औकात से बाहर है!
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20
जागना भी कबूल हैं तेरी यादों में रात भर, तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ ❤️❤️
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60