अंदाज मुझे भी आता है, नज़र अंदाज करने का पर तू तक़लीफ़ से गुजरे ये मुझे गवारा नही |❤️
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मुझको क्या डराओगे मौत से मैं तो पैदा ही क़ातिलों की गली में हुआ हूँ। ?
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नसीहत अच्छी देती है दुनिया अगर दर्द किसी ग़ैर का हो
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मुझे पसंद है शांत रहना, इसे मेरी 'कमजोरी' मत समझना ।
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बेहतर से बेहतर तलाश करो, नदी मिल जाए तो समन्दर की तलाश करो |?
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पास आकर सभी दूर चले जाते है अकेले थे हम, अकेले ही रह जाते है इस दिल का दर्द दिखाए किसे मल्हम लगाने वाले ही जख्म दे जाते है।
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तकलीफ़ खुद ही कम हो गई, जब अपनों से उम्मीदें कम हो गई…??
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दर्द की बात मत करो जिसने भी दिया है बेमिसाल दिया है |?
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तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.
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हम ऊंची आवाज़ पसंद नहीं करते, ख़ामोश रहो या औकात में ??
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हजारों उलझनें राहों में, और कोशिशें बेहिसाब; इसी का नाम है ज़िन्दगी, चलते रहिये जनाब। ?
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बादशाह नही, टाइगर हूँ मैं, इसलिए लोग इज्ज़त से नही, मेरी इजाज़त से मिलते है।?
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कुछ यूँ ही चलेगा तेरा मेरा रिश्ता उम्र भर, मिल गए तो बातें लम्बी न मिले तो यादें लम्बी।। ❤️❤️
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दिल की ना सुन, ऐ फ़कीर कर देगा, वो जो उदास बैठे हैं नवाब थे कभी.
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जिंदगी अपनी है तो,? अंदाज भी अपना ही होगा?
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इश्क का समंदर भी क्या समंदर है... जो डूब गया वो #आशिक... जो बच गया वो #दीवाना... जो तैरता ही रह गया वह #पति
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कुछ कह गए, कुछ सह गए, कुछ कहते कहते रह गए..❗️ मै सही तुम गलत के खेल में, न जाने कितने रिश्ते ढह गए..‼️
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कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम
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तू उदास मत हुआ कर इन हज़ारो के बीच आखिर चांद भी तो तन्हा है सितारों के बीच |
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खुदा ने मुझे वफादार दोस्तों से नवाज़ा है याद मैं ना करूँ, तो कोशिश वो भी नहीं करते
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बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है
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मुकाबला भी करेंगे छोटे पहले तू बराबरी तो कर ले..?
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पुरानी होकर भी खास होती जा रही है मोहब्बत बेशर्म है जनाब बेहिसाब होती जा रही है |
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अगर साथ होते वो तो जरूरत होती, अपने अकेले के लिए में कायनात क्या मांगू…
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मंजिले कितनी भी ऊंची हो रास्ते हमेशा पैरों के नीचे होते हैं |
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तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
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एक बार देखा था उसने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए, बस! इतनी सी हकीकत है, बाकी सब कहानिया है
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उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी
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तमाशा तो सच का होता है, झूठ की तो तारीफ़ होती हैं!?
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