"दिल में आने का रास्ता तो होता है, लेकिन जाने का नहीं, इसलिए जो भी जाता है दिल तोड़कर जाता है !!"
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पहचान बड़े लोगो से नहीं, साथ देने वाले लोगो से होनी चाहिए |?????
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कभी साथ बैठो चाय पर तो दुख दर्द बतायें, युं दूर से पुछोगे तो खैरियत ही कहेंगे??
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मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की..कोई आप सा तो हो, लेकिन किसी और का ना हो..
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दर्द ? है मगर ज्यादा नहीं नाराज़ हूँ ,मगर बिछड़ने का इरादा नहीं !!?
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जब भी मैं तुमसे दूर होता हूँ, मुस्कुराते हुए तुम्हारे पुराने मेसेज और चिट्ठियां दोबारा दोबारा पढता हूँ ! हाँ ! तुमसे इतना प्यार करता हूँ मैं
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मैं क्यों पुकारू उसे कि लोट आओ उसे खबर नहीं कि कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाए.
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नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
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जरुरी तो नहीं हर पल तेरे पास रहू मोहब्बत और इबादत दूर से भी की जाती है
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कुछ नही भुले हम बस मौके का इंतजार कर रहे है..! ??
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सुकून की तलाश में हम दिल बेचने निकले थे, खरीददार दर्द भी दे गया और दिल भी ले गया.
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सीख जाओ वक्त पर किसी की चाहत की कदर करना, कहीं कोई थक ना जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते |❤️
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जिंदगी की उलझनों ? ने मेरी शरारतें कम कर दीं, और लोग समझते है कि मैं समझदार ? हो गया ।
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बहुत मुश्किल है उस शख्स को गिराना, जिसको चलना ठोकरों ने सिखाया हो .
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लोग वाकिफ हैं मेरी आदतों से रूतबा कम ही सही पर लाजवाब रखता हूँ |
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बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में...इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं...!
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अभी से वो होना शुरू कीजिये जो आप भविष्य में होंगे
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शराफत की दुनिया का किस्सा खतम, अब जैसी दुनिया वैसे हम |
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अगर आपका रास्ता सबसे अलग है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप खो गए है
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एक ख़्याल ही तो हूं, याद रहे तो रख लेना, वरना सौ बहाने मिलेंगे मुझे भुल जाने के |??
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सोचा ही नहीं था..जिन्दगी में ऐसे भी फ़साने होगें, रोना भी जरूरी होगा..और आँसू भी छुपाने होगें.!
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वादों की तरह इश्क भी आधा रहा, मुलाकातें कम रही इंतजार ज्यादा रहा.
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सिर्फ उमर ही छोटी है, जजबा तो दुनिया को मुठ्ठी में करने का रखते है.??
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जीत हासिल करनी हो तो क़ाबिलियत बढ़ाओ ! क़िस्मत की रोटी तो कुत्तों को भी मिला करती है !!"
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जुदा होने का शौक भी पूरा कर लेना जनाब, लगता है तुझे हम ज़िंदा अच्छे नहीं लगते!?
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किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
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बोहत खुश थे हम साथ में फिर उसे किसी और का साथ मिल गया |
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इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।
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Diabetes का डर इतना बढ़ गया है के मीठा खाना तो छोड़ ही दिया है बल्कि मीठा बोलना भी छोड़ दिया है
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हम मरेगें भी तो उस अंदाज से मरेगें, जिस अंदाज में लोग जीने को भी तरसते है
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