तुमने समझा ही नहीं और ना समझना चाहा, हम चाहते ही क्या थे तुमसे “तुम्हारे सिवा |❤️
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एक तमन्ना थी कि ज़िन्दगी रंग बिरंगी हो और दस्तूर देखिए, जितने मिले गिरगिट ही मिले | ❤️
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अपने ही हमें खुश नहीं देखना चाहते, तो गैरों से क्या शिकायत |??
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मोहब्बत भी ठंड जैसी है, लग जाये तो बीमार कर देती है
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ना होने का एहसास सबको है, मौजूदगी की कदर किसी को नहीं...?
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सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना सीख लो मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है. |
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अब अगर तुम जाने ही लगे हो तो पलट कर मत देखना, *क्योकि मौत की सजा लिखने के बाद कलम तोड़ दी जाती है*
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बहुत अच्छा लगता है उन रिश्तेदारों के घर जाना, जो जाते ही कहते हैं कि बेटा वाइफ़ाई का पास्वर्ड लो और आराम से अपना घर समझ के बैठो ?
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अच्छे इंसान मतलबी नहीं होते, बस दूर हो जाते हैं, उन लोगों से जिन्हें उनकी कद्र नहीं होती....
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किसीने क्या खूब कहाँ हैं, मोहब्बत नहीं यादें रुलाती हैं..!?
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सच्चे दोस्त हमे कभी गिरने नहीं देते,ना किसी कि नजरों मे ना किसी के कदमों मे.!!❤️
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मोहब्बत में शक ? और गुस्सा ? वही लोग करते हैं, जो आपको खोने से डरते हैं।
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बड़ा अजीब ये दुनिया का मेला है, इतनी भीड़ में भी हमारा दिल ❤️अकेला है।
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बचपन से ही शौक था अच्छा इंसान बनने का, लेकिन बचपन खत्म और शौक भी खत्म.?
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जब तुम मेरी फिकर करते हो न तब जिन्दगी जनत सी महेसुस होती है
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मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है
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जिस दिन उसपर दिल आया था, उस दिन मौत आ जाती तो अच्छा रहता |
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बहुत अंदर तक जला देती है, वो शिकायतें जो बयाँ नही होती..??
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दर्द ? है मगर ज्यादा नहीं नाराज़ हूँ ,मगर बिछड़ने का इरादा नहीं !!?
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तुम बिन जिया जाए कैसे …कैसे जिया जाए तुम बिन…
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हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है .
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कुछ रिश्ते निभाने के लिए आपका, नासमझ बने रहना जरूरी है...
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तेरे पास जो है उसकी कदर कर , यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
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वाकिफ थे बाकायदा उन गलियों से हम फिर भी ना जाने कैसे ठोकर लग ही गयी।
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अब तो मोहब्बत ?भी सरकारी नौकरी ? जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों ? को तो मिलती ही नहीं
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हमको मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं, हमसे ज़माना है ज़माने से हम नहीं.?
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"आदमी का अमीर होना जरूरी नहीं है जमीर होना जरूरी है।" ?
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तू उदास मत हुआ कर इन हज़ारो के बीच आखिर चांद भी तो तन्हा है सितारों के बीच
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खुबसूरत सा वो पल था, पर क्या करें वो कल था.?
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जिंदगी का खेल शतरंज से भी मज़ेदार होता है, लोग हारते भी है तो अपनी ही रानी से
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