मुसाफ़िर कल भी थी मुसाफ़िर आज भी है, कल अपनों की तलाश में थी आज अपनी तलाश में हूँ!!!?
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नहाए धोए से हरी मिले तो मै नहाऊं सौ बार हरि तो मिले निर्मल हृदय से प्यारे मन का मैल उतार |
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वो मेरी गलतियाँ निकालते है, क्योंकि ये मुझे हराने से आसान है ।?
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एक आखिरी मुलाक़ात की ख्वाहिश थी पर अलविदा भी वो फ़ोन पर ही कह गए....?
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मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी
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तुम सिर्फ मेरा नाम जानते हो, उसके पीछे की कहानी नहीं..! ?
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किसीने क्या खूब कहाँ हैं, मोहब्बत नहीं यादें रुलाती हैं..!?
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निगाहों ? से भी चोट लगती है, जनाब जब कोई देखकर भी अनदेखा कर देता हैं।।?
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हम उनसे रीश्ता नही रखते, जिन्हे उंचाईयों से डर लगता है | ??
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रोज़ रोते ? हुए कहती है ज़िन्दगी, एक बेवफ़ा के लिए मुझे बर्बाद मत कर | ?
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आँखों में देखी जाती हैं.. प्यार की गहराईयाँ...शब्दों में तो छुप जाती हैं.. बहुत सी तन्हाईयाँ....
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ना जाने किस बात पे वो नाराज हैं हमसे, ख्वाबों मे भी मिलता हूँ तो बात नही करती..!?
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यूँ ना छोड़ कर जाया करो बार-बार,अगर मैं रूठ गया तो,मेरी एक झलक को भी तरसोगी |
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तुम्हारे अपनों में? हमारे चाहने वाले बहुत है?
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फिक्र करना ही क्यूँ फिक्र से होता है क्या | भरोसा रखो "श्याम" पर फिर देखो होता है क्या ||
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हर बात दिल पे लगाओगे तो रोते रह जाओगे , जो जैसा है उसके साथ वैसा बनना सीखो.
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ठोकर इसलिए नहीं लगती कि इंसान गिर जाए बल्कि वो तो इसलिए लगती है कि इंसान सुधर जाए .
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दिल पर लग जाती है उन्हें अक्सर हमारी बातें , जो कहते थे तुम कुछ भी बोलो बुरा नहीं लगता...
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अब वही होगा जो दिल चाहेगा, आगे जो होगा देखा जाएगा!?
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बहुत कुछ कहा था तुझसे, लेकिन जब तुम हाल ना समझ सके तो बातें कहाँ से समझोगे।
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हम दोनों एक ही किताब में रहेंगें, तुम गुलाब के जैसे, मैं खुशबू की तरह.
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ज़िंदगी में जो हम चाहते हैं वो आसानी से नहीं मिलता, लेकिन ज़िंदगी का एक सच यह भी है कि जो हम चाहते वो आसान नहीं होता
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हम रिश्ते कम बनाते है मगर दिल से निभाते है
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तुझे मेने धड़कनो में बसाया तो धड़कने भी बोल उठी अब मज़ा आ रहा है धक् धक् करने में
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ज़िंदगी में प्यार क्या होता है ये उस शक्स से पूछो जिसने दिल टूटने के बाद भी इंतज़ार किया हो
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मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है..
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मैं हर रूप में तुम्हारी मदद के लिए आता हूँ ; मुझे ढूंढो मत केवल पहचानो |
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कांटे तो नसीब में आने ही थे, फूल जो हमनें गुलाब का चुना था?
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तेरी आँखों?से यूँ तो सागर भी पिए है मैंने?…तुझे क्या खबर जुदाई के दिन कैसे जिए है मैंने…!!
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मोहब्बत कितनी भी सच्ची कर लो ..... लोंगो को सच्ची मोहब्बत वाले नही .... अच्छी शक्ल वाले ही पसन्द आते है ...
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