जाते वक्त बहोत गुरूर से कहा था उसने.... "तुम जैसे हजार मिलेंगे" मैंने मुस्कुरा कर कहा.... " मुझ जैसे की ही तलाश क्यों
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29
जिनकी हँसी खुबसूरत होती है, उनके 'ज़ख्म' काफी गहरे होते है ।
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56
इक भाई है जिससे मुझे प्यार है वह कोई और है मेरा अनमोल यार है
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427
वो भी बात करते है कदर की , जो खुद किसी की कदर नहीं करते...
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29
यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...
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52
सोचा था कि बताएंगे सब दर्द तुमको, पर तुमने तो इतना भी न पूछा कि ख़ामोश क्यों हो |?
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36
चीजें खुद नहीं होतीं , उन्हें करना पड़ता है
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67
बुरा नहीं हूँ मैं मेरी भी कुछ कहानी है, टूट चुका हूँ मैं, अपनो की मेहरबानी हैं.??
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114
कितना खुश था कभी मैं खुद की ही दुनियाँ में ये गैरों की मोहब्बत ने मुझे तबाह कर दिया |
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23
भाड़ में जाए लोग और लोगो की बातें, हम तो वैसे ही जिएंगे जैसे हम जीना चाहते है।?
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158
तुने अच्छा ही किया मुझे गलत समझ कर, में भी थक गया हूँ खुद को साबित कर-कर के.
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20
तू चालाकी से कोई चाल तो चल, जीतने का हुनर मुझ में आज भी हैं !
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18
तुम हो तोह कुछ कमी नहीं .... तुम नहीं तोह कुछ नहीं ..
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यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी , ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...
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156
उस किताब ? सा हूं मैं, जिसे तुमने कई बार पढ़ा ? लेकिन कभी समझा नहीं।
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47
बड़ी कश्मोकश है इन दिनो ज़िन्दगी में...किसी को ढूंढते फिर रहे हैं हर किसी में....
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मेरी ख़ामोशी को मेरी कमज़ोरी मत समझो मैं दिल में गालियां भी देती हूँ
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151
तू मेरी नक़ल तो कर लेगा, लेकिन बराबरी कैसे करेगा..!!?
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मुझे इन्तजार था कि तुम समझो मुझको तुमने समझा दिया कि बस इन्तज़ार करो |
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33
तुम जिन्दगी में आ तो गये हो मगर ख्याल रखना, हम ‘जान’ दे देते हैं, मगर ‘जाने’ नहीं देते !!
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40
मैं हर रूप में तुम्हारी मदद के लिए आता हूँ ; मुझे ढूंढो मत केवल पहचानो |
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20
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
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192
अभी तो उनसे नजरें मिली ही थीं, कि हम अपना दिल वहीं छोड़ आये! कहने को तो बहुत कुछ था, पर कम्बखत वक़्त को हम रोक न पाये!!
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प्यार आज भी तुझसे उतना ही है बस तुझे एहसास नहीं और हमने भी जताना छोड़ दिया
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244
कुत्ता ? है तू भोका कर दहाड ? सिर्फ हमारी पेहचान है..!
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सफल वही होता है, जो रास्ते में आने वाली परेशानियों से ज्यादा, मंजिल के बारे में सोचता है…
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नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !
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जिसकी सज़ा सिर्फ़ तुम हो मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है..❤️❤️
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अल्फ़ाज़ के कुछ तो कंकर फ़ेंको, यहाँ झील सी गहरी ख़ामोशी है।”
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यूँ ही भटकते रहते हैं अरमान तुझसे मिलने के, न ये दिल ठहरता है न तेरा इंतज़ार रुकता है
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