उनकी ख़ुशी ढूँढ़ते - ढूँढ़ते, मेरे ख्याब ने खुद ख़ुशी कर ली |
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चेहरे के रंग देखकर, दोस्त ना बनाना दोस्तों.. "तन" का काला चलेगा लेकिन "मन" का काला नहीं..?
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तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
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गम ने हंसने ना दिया, जमाने ने रोने ना दिया, नींद आई तो तेरी याद ने, सोने न दिया।?
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कितनी झूठी है ना मोहब्बत की कसमे, देखो ना ! तुम भी जिन्दा हो, मै भी जिन्दा हुँ
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नहीं करता मैं तेरा जिक्र किसी तीसरे से, तेरे बारे में बात सिर्फ खुदा से होती है.
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मै थक गया था परवाह करते करते, जब से बेपरवाह हूँ, आराम सा है। ?
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कुछ साथ यकीन दिलाते हैं की प्रेम वाकई खूबसूरत है |
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शोर करने वाले अगर खामोश हो जाये, तो उनकी ख़ामोशी से सुकून नहीं खौफ आता है ❤️?
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सीख जाओ वक्त पर किसी की चाहत की कदर करना, कहीं कोई थक ना जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते ?
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बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!
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जानते हो मोहब्बत किसे कहते हैं किसी को दिल से चाहना उसे हार जाना और फिर खामोश रहना
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रूप रंग ही अगर प्रेम का आधार होता, तो जिसे कभी देखा ही नहीं उससे कैसे प्यार होता। ❤️❤️
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नाम एक दिन में नहीं बनता, लेकीन एक दिन जरूर बनता है। ?
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औकात नहीं है दुश्मनो की आँख से आँख मिलाने की, और बात करते हैं साले घर से उठाने की..!!
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कोई अजनबी ख़ास हो रहा है,लगता है फिर प्यार हो रहा है…
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कहा ना,सुकून मिलता है जब-जब तुम्हें सोचते हैं
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किसी से नाराजगी इतने वक्त?️तक ना रखो कि वह तुम्हारे बगैर ही जीना सीख जाए…!!?
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ना चाँद अपना था और ना तू अपना था ...!! काश दिल भी मान लेता की सब सपना था
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पहला प्यार और आखिरी एग्जाम को हम कभी सीरियस नहीं लेते ?
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आ बैठ मेरे मालिक आज बटवारा कर ही लें, सारी दुनिया तेरी और सिर्फ तूं मेरा |
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जिस जगह से कोई लौटकर नहीं आता, आज ना जाने क्यों वहां जाने का दिल कर रहा है...??
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मुफ्त में नही सीखा उदासी में मुस्कुराने का हुनर, बदले में ज़िन्दगी की हर खुशी तबाह की है हमने..??
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तुम जब कहोगे हम तब मिलेंगे, लेकिन एक शर्त पर, न घड़ी तुम पहनोगे, न वक्त हम देखेंगे।❤️❤️
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|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||
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मेरे ज़ज्बात की कदर ही कहाँ, सिर्फ इलज़ाम लगाना ही उनकी फितरत है !!
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हम बुरे है इसमें कोई शक नहीं पर कोई बुरा कहे इतना किसी को हक़ नहीं ?
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सब छोड़ते ही जा रहे हैं मुझको ऐ ज़िन्दगी, तुझे भी इजाज़त है, जा जा के ऐश कर |
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अजब पहेलियाँ हैं हाथों की लकीरों में सफ़र ही सफ़र लिखा हैं हमसफ़र कोई नहीं |
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तेरे पास जो है उसकी कदर कर , यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
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