ईमानदारी, एक मंहगा ? शोख है।जिसको पूरा करना, सबके हैसियत की बात नहीं। ?
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कोई भी रिश्ता अधूरा नहीं होता , बस निभाने की चाहत दोनों तरफ होनी चाहिए।
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किसी के अंदर ज़्यादा डूबोगे तो टूटना पड़ेगा यकीन न हो तो बिस्कुट से पूछ लो
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उनकी जब मर्जी होती है तब हमसे बात करते हैं, और हम पागल पूरा दिन उनकी मर्जी का इंतज़ार करते हैं|
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जहाँ दूसरे को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना बहतर होता है.
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बस यूं ही थम के रहे गया कारवां दिल का, हम कहे नहीं पाए उन ने सुनना नहीं चाहा!
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झूठी शान के परिंदे ही ज्यादा फड़फड़ाते है, बाज़ की उड़ान में कभी आवाज नही होती।
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं, दिल हमेशा उदास रहता है.
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तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
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छोड़ तो सकता हूँ मगर छोड़ नहीं पाता उसे, वो शख्श मेरी बिगड़ी हुई आदत की तरह है!!?
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सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस माँ के चरण में
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लोगों की निंदा से परेशान होकर, अपना रास्ता ना बदलना, क्योंकि सफलता शर्म से नहीं, साहस से मिलती है। ??
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दुनिया खामोशी भी सुनती है, लेकिन पहले दहशत मचानी पड़ती है |?
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पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना
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कुछ नही भुले हम बस मौके का इंतजार कर रहे है..! ??
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यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...
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दिल की जिद हो तुम वरना, इन आखों ने बहुत लोग देखे है |❤️
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बहुत सोच समज कर रूठा करो अपनो से, आज कल मनाने के रिवाज नही हैं ।। ?
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खिलाड़ी अगर टक्कर का हों, तभी खेलने में मज़ा आता है |??
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एक ऐसा लक्ष्य भी होना चाहिए जो सुबह उठने पर मजबूर कर दे.
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बहुत उदास ? है कोई तेरे चुप हो जाने से, हो सके तो बात कर किसी बहाने से। ❤️
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सजा तो बहुत दी है ज़िंदगी ने पर कसूर क्या था वो नहीं बताया..?
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पहला प्यार बचपन की उस चोट की तरह होता है, जिसके निशान जिंदगी भर रह जाते हैं.
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वक़्त पर ना जा वक़्त तो हर ज़ख्म की दावा है, आज तुमने हमे भुला दिया कल तुम्हे भी कोई भुला देगा
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हजारो चेहरों में उसकी झलक मिली मुझको.. पर. दिल भी जिद पे अड़ा था कि अगर बो नहीं , तो उसके जैसा भी नहीं।
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परख ना सकोगे ऐसी शख्सियत है मेरी, मैं उन्हीं के लिए हूं जो जाने कदर मेरी..?
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सब खरीदा जा सकता हैं, बस जेब भारी चाहिए..!??
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हम जुड़े हुए हैं प्यार की डोर से, गुस्सा तो हो सकते हैं पर जुदा नही.!
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अब तो मोहब्बत ?भी सरकारी नौकरी ? जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों ? को तो मिलती ही नहीं
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नज़र से नज़र मिला के तुम नज़र लगा गए, ये कैसी लगी नज़र कि, हम नज़र में आ गए !!
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