अब नहीं है, हमे किसी के लौटने का इंतज़ार जो मेरे थे वो मेरे साथ है, जो नहीं थे वो आजाद है...??
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इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।
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उनकी नफरत बता रही है, हमारी मोहब्बत गज़ब की थी ?
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रेल की खिड़कीयां तो खोल दी थी हमने मगर रात थी जब तुम्हारा शहर आया था....!
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जिनको जाना होता है वो चले ही जाते है किसी के रोने से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता
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चंद पल साथ रहा फिर जुदा हो गया एक शख़्स न जाने कब खुदा हो गया |
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जो “दोगे” वही लौट कर आएगा, चाहे वह “इज्जत” हो या “धोखा”..?
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बहुत नाराज़ थे तो रो पडे, अपनों से क्या ही शिकायत करते |?
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जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....
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शिकायत जिन्दगी से नहीं , उनसे है जो जिन्दगी में नहीं है .
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बहुत देखा है ज़िन्दगी में समझदार बनकर ,, मगर खुशी हमेशा पागल बनकर ही मिली है।
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गिरगिट की आखिरी जुबान “में आजकल रंग बदलने में लोगों का मुकाबला नहीं कर पा रही हूं
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उसने कहा तुम सबसे अलग हो, सच कहा और कर दिया मुझे सबसे अलग |
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अब इतने भी भोले नहीं कि तुम वक़्त गुज़ारो और हम उसे प्यार समझे |
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तकलीफ़ खुद ही कम हो गई, जब अपनों से उम्मीदें कम हो गई…??
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छोड़ तो सकता हूँ मगर छोड़ नहीं पाता उसे, वो शख्श मेरी बिगड़ी हुई आदत की तरह है!!?
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?? उस शाम तुमने मुड़कर मुझे देखा जब, यूँ लगा जैसे हर दुआ कुबूल हो गयी ??
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रूप रंग ही अगर प्रेम का आधार होता, तो जिसे कभी देखा ही नहीं उससे कैसे प्यार होता। ❤️❤️
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कभी कभी नाराजगी, दूसरों से ज्यादा खुद से होती है।?
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मुलाकात बनकर मिला था मुझ से कोई बड़ी जल्दी गुजर गया वक़्त की तरह.
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परवाह नहीं चाहे ज़माना कितना भी खिलाफ हो हिसाब सबका होगा चाहे कोई कितना भी बड़ा नवाब हो |??
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जब किस्मत में ही न हो कोई परी तो फिर किस बात की 14 फरवरी
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आज भी यकीन नहीं होता मुझे, क्या इतना आसान था, इस इश्क़ से निकल जाना???
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23
सहारे ढूढ़ने की आदत नहीं हमारी, हम अकेले पूरी महफ़िल के बराबर हैं।
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कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम
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मेरे आँसुओं के दाम तुम चुका नहीं पाओगे, मोहब्बत न ले सके तो दर्द क्या खरीद पाओगे।❤️
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रूठना हुस्न का हक है मनाना आशिक की इबादत |
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वो वक़्त कुछ और था, वो इश्क़ का दौर था, ये वक़्त कुछ और है, ये ख्वाहिशों का दौर है.!
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अब अगर तुम जाने ही लगे हो तो पलट कर मत देखना, *क्योकि मौत की सजा लिखने के बाद कलम तोड़ दी जाती है*
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हम तो झुके थे तेरे इश्क में तूने, तो गिरा हुआ ही समझ लिया |
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