दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है,एक कामयाबी ही है जो ठोकर लगने से मिलती है
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उन दिनों को याद करके हम मुस्कुराने लगते है,अपने दोस्तों की दोस्ती पे इतराने लगते है।
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दुनिया में रहने की सबसे अच्छी दो जगह ‘किसी के दिल में’ या ‘किसी की दुआओं में’
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जो लोग मेरे दिल मे रहते है कराया दे दो प्लीज
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ईमानदारी से कर्म करने वालों के शौक भले ही पूरे ना हो पर नींद जरूर पूरी हो जाती है .
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तुमने ना सुनी धडकन हमारी पर हमने महसूस की सांस तुम्हारी
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चाय ख़त्म होने तक तुम रुकने का वादा करो, हम आखिरी घूँट भी आखिरी साँस तक पीते रहेंगे.
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जब रिश्तों में ग़लतफहमी आ जाये तो, सच्चा प्यार भी झूठा लगने लगता है.
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ज़िन्दगी में मंज़िले तो मिल ही जाती हैं ! लेकिन वो लोग नहीं मिलते जिन्हें दिल से चाहा हो ! ??
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क्या करोगे अब मेरे पास आकर खो दिया तुमने मुझे बार-बार आजमा कर..
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खुशियाँ दिखावे की हो सकती हैं, जनाब ग़म तो छुपाने से भी नहीं छुपता है|
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अकेले रहने का भी एक अलग सुकून हे | ना किसी के वापस आने की उम्मीद, ना किसी के छोड़ जाने का डर.....
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ऐसे कार्य करें जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है
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एक ख्याल ही तो हूँ मैं ..याद रह जाऊँ .. तो याद रखना ..वरना...सौ बहाने मिलेंगे ...भूल जाना मुझे....
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चाय जैसी उबल रही है ज़िंदगी मगर, हम भी हर घूँट का आनंद शौक़ से लेंगे☕
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अब इतने भी भोले नहीं कि तुम वक़्त गुज़ारो और हम उसे प्यार समझे |
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प्रेम हो तो राधा कृष्ण जैसा भले ही साथ ना हुए मगर नाम आज भी साथ लिया जाता है..!!
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अपने काम को एक रहस्य ही रहने दो!, लोगों को काम का नतीजा दिखाओ!!
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हमारी सोच और पहचान दोनो ही, तेरी’औकात’ से बाहर हैं। ??
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फिर ग़लतफैमियो में डाल दिया.. जाते हुए मुस्कुराना ज़रूरी था
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कौन होता है दोस्त? दोस्त वो जो बिन बुलाये आये, बेवजह सर खाए, जेब खाली करवाए, कभी सताए, कभी रुलाये, मगर हमेशा साथ निभाए.
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जरा सा भी नहीं पिघलता दिल तुम्हारा, इतना क़ीमती पत्थर कहाँ से खरीदा ..❤️?
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मत चाहो किसी को इतना की बाद में रोना पडे, क्यूंकि ये दुनियां दिल से नहीं ज़रूरत से प्यार करती हैं।
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इस दिल में तुम्हारे सिवा किसी को इजाजत नहीं
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खुदा ने मुझे वफादार दोस्तों से नवाज़ा है याद मैं ना करूँ, तो कोशिश वो भी नहीं करते
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जरूरत और खाविश दोनों आप ही हो खुदा करे कोई एक पूरी हो जाये |?
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हैसियत का कभी अभिमान न करना उड़ान ज़मीं से शुरू और जमीं पे ही ख़त्म होती है ?
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सजा ये है कि बंजर जमीन हूँ मैं और, जुल्म ये है कि बारिशों से इश्क़ हो गया |
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कभी कभी इंसान ना टूटता है ना बिखरता है बस हार जाता है कभी किस्मत से तो कभी अपनों से
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कभी किसी की इतनी परवाह मत करो.. की वो,बेपरवाह हो जाए..
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