याद हैं हमको अपने तीनो गुनाह ! एक तो मोहबत कर ली, दूसरा तुमसे कर ली और तीसरा बेपनाह कर ली...!
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रात भर जलता रहा ये दिल उसकी याद में समझ नहीं आता दर्द प्यार करने से होता है या याद करने से |
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7
कमाल हैं ना ...? सांसे मेरी जिंदगी मेरी मोहब्बत मेरी , मगर जीने के लिये जरूरत तेरी
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194
हौसले ? का सबूत देना था, इसलिए ठोकर खाकर भी मुस्कुरा ? पड़े.
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115
तकलीफ तो जिंदगी देती हैं,? मौत को तो लोग युही बदनाम करते हैं...! ?
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25
लोग कुछ भी कहें हम वहीं करेंगे जो, हमें अच्छा लगे क्योंकि वो वो हैं और हम हम है,।
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171
ठंड तो आज ऐसे पढ़ रही है जैसे कल उसका पेपर हो
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594
जीने का असली मजा तो तब है दोस्तों जब दुश्मन भी तुमसे हाथ मिलाने को बेताब रहे..! ? ?
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13
समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...
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40
शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है
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63
मैं रूठ जाऊँ तो मना लेना, बातों से बात ना बने तो गले लगा लेना। ❤️ ?
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61
हम तो मोहबत के नाम से भी अनजान थे, एक शख्स की चाहत ने पागल बना दिया ❤️?
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162
अब शिकायतें नहीं होती किसी से, बस हल्का सा मुस्कुरा देता हूं.
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22
किसी पर कभी भी बहुत ज्यादा निर्भर ना रहे क्योकि अंधेरो में परछाई भी साथ छोड़ देती है
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164
बुरा लगता है हर बार किसी को अपनी याद दिलाना जिन में वफ़ा होती है खुद ही याद कर लेते हैं
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26
अगर आप चाहते हैं कि कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये
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136
दुनिया में रहने की सबसे अच्छी दो जगह किसी के दिल में या किसी की दुआओं में ?
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141
हर रोता हुआ लम्हा मुस्कुराएगा,? तू सब्र रख अपना वक्त भी आएगा..⌚
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241
बुरा किया भी नहीं और बुरे बन भी गए हम |??
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बुरे वक्त ⏱️ में भी किसी से कोई उम्मीद मत रखो, क्योकि समझौते शेर ? को भी कुत्ता ? बना देते है.
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क्या खाक तरक्की की आज की दुनिया ने, मरीज ऐ इश्क़ तो आज भी लाइलाज बैठे है. ?❤️
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10
लाश पता नहीं किस बदकिस्मत की थी, मगर क़ातिल के पैरो के निशान बड़े हसीन थे !!??
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5
मेरी थी जो खामियां ,तुझसे पूरी हुई …बाक़ी हुवे बेवजह ,तू ज़रूरी हुई …
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89
उसूलों पे चलना एक मेहेंगा शौक है, जो हर दो टके के इंसान के बस की बात नही..! ?
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21
काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |
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36
माचिस तो यूं ही बदनाम है,, हमारे तेवर तो आज भी आग ? लगाते हैं!
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8
ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....
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38
इश्क़ की बात न करो जनाब जले बैठे हैं, खामखा गाली दे देंदे |?
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रिश्ते और पतंग जितनी उँचाई पर होते हैं काटने वालो की संख्या उतनी अधिक होती हैं?
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दिखावे के शरीफ बनने की आदत नही है, ?हमारे शब्द चाहे जैसे भी हो खुलेआम बोलते है | ?
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