हमको मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं, हमसे ज़माना है ज़माने से हम नहीं.?
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ज़रा सी वक़्त ने करवट क्या ली ! गैरों की लाइन में सबसे आगे अपनों को पाया हमने ?
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72
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है , पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !
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37
सारी दुनिया रूठ जाए मुझे कोई दुख नहीं बस एक तेरा खामोश रहना... मुझे अन्दर तक तकलीफ़ देता है..
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118
मेरी थी जो खामियां ,तुझसे पूरी हुई …बाक़ी हुवे बेवजह ,तू ज़रूरी हुई …
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89
दुश्मन के सितम का खौफ नहीं हमको, हम तो दोस्तो के रूठ जाने से डरते है !❤️?
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87
उम्मीद जिंदा रखिए साहेब, आज हँसने वाले कल तालिया भी बजाएंगे..!❤️?
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121
रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा, प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा,
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841
कभी फुर्सत हो तो इतना जरूर बताना, वो कौन सी मोहब्बत थी जो हम तुम्हें ना दे सके.
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10
"आदमी का अमीर होना जरूरी नहीं है जमीर होना जरूरी है।" ?
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123
यूँ ही भटकते रहते हैं अरमान तुझसे मिलने के, न ये दिल ठहरता है न तेरा इंतज़ार रुकता है
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ज़िंदगी में जो हम चाहते हैं वो आसानी से नहीं मिलता, लेकिन ज़िंदगी का एक सच यह भी है कि जो हम चाहते वो आसान नहीं होता
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खुदा ने मुझे वफादार दोस्तों से नवाज़ा है याद मैं ना करूँ, तो कोशिश वो भी नहीं करते
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लोग तो दुनियाँ वालो से यारी करते है मेरी तो दुनियाँ बनाने वालो से यारी है
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मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है , मिल जाए तो भी ना मिले तो भी
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ऐ दिल तू क्यों रोता है , ये दुनिया है यहाँ ऐसा ही होता है.
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दुनिया खामोशी भी सुनती हैं, लेकिन पहले धूम मचानी पड़ती हैं. ?
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21
हम घोड़े के ट्रिगर पे नही, बल्की खुद के जिगर पे जीते है..!?
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हमने तो मोहब्बत कीयी थी वो भी कर लेती तो शायद इश्क कहलाता...।
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13
"अगर अपनी औकात देखनी है तो अपने बाप के पैसे का इस्तेमाल करना छोड़ दो."
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ख्वाब चुभते रहते है, आंखों में सारी रातभर, वो पूछते रहे वजह आँखो के लाल होने की ! ❤️
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डाल कर...आदत बेपनाह मोहब्बत की...अब वो कहते है...कि...समझा करो वक़्त नही है...
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तुम मेरे हो, ये अफ़वाह फेलाह दूँ क्या ? मुझसे जलने ? वालों को थोड़ा और जला ? दूँ क्या ?
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अगर आप जिद्दी हो तो आप अपने हर सपने को हकीकत में बदल सकते हो
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जो कहते थे मुझे डर है कहीं मैं खो न दूँ तुम्हे, सामना होने पर मैंने उन्हें चुपचाप गुजरते देखा है... !!
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अपने ही हमें खुश नहीं देखना चाहते, तो गैरों से क्या शिकायत |??
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बहुत ज्यादा जुल्म करती हैं तुम्हारी यादे, सो जाऊ तो जगा देती हैं, उठ जाऊ तो रुला देती हैं .
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काल भी तुम और महाकाल भी तुम लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम शिव भी तुम और सत्यम भी तुम |
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कर्जदार हूं उस हकीम का, जिसनें दवा में तेरा दीदार लिखा |
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16
बस एक बार , उलझना है तुमसे, बहुत कुछ , सुलझाने के लिये
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