बिन धागे की सुई सी बन गई है ये ज़िंदगी, सिलती कुछ नहीं, बस चुभती चली जा रही है…?
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24
तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है,नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है।
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104
काश तुम भी मुझे ऐसे चाहो, जैसे तकलीफ़ में सुकून.??
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60
सहने की हिम्मत ? रखता हूं, तो तबाह ? करने का हौसला भी
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146
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
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97
कभी-कभी किसी से ऐसा रिश्ता भी बन जाता हैं...कि हर चीज से पहले उसी का ख्याल आता है
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252
खुश हो ना हमारा प्यार अधूरा रह गया.. पर तेरा टाइमपास पूरा हो गया ..
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821
बचपन से ही शौक था अच्छा इंसान बनने का, लेकिन बचपन खत्म और शौक भी खत्म..?
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61
सुकून की तलाश में तुम्हारी आँखों में झाँका था, किसे पता था कम्बखत दिल का दर्द और मिल जाएगा |?
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10
चले जाएंगे तुझे तेरे हाल पर छोड़कर, कदर क्या होती है ये तुझे वक्त सिखा देगा ??
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6
मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?
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327
हम सादगी में झुक क्या गए, तुमने तो हमे गिरा हुआ समझ लिया |?
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62
बात इतनी मधुर रखो कि, कभी खुद भी वापिस लेनी पड़े तो कड़वी ना लगे..!!❤️
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150
हौसले बुलंद ? हो तो तकदीर भी सलाम ठोकती है..! ?
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119
तुमको भी कहाँ जरूरत है मेरी, तुम्हारे लिये तो मैं भी बिछड़ा हुआ जमाना हूँ.....!!
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52
हमने तो मोहब्बत कीयी थी वो भी कर लेती तो शायद इश्क कहलाता...।
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13
बड़ा गजब किरदार है मोहब्बत का, अधूरी हो सकती है मगर खत्म नहीं!
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5
उनका बादा भी अजीब था - बोले जिन्दगी भर साथ निभाएंगे ,पर पागल हम थे - ये पूछना भूल ही गए के मोहबत के साथ या यादो के साथ !
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363
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
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उसने कहा तुम सबसे अलग हो, सच कहा और कर दिया मुझे सबसे अलग |
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34
जब तुम मेरी फिकर करते हो न तब जिन्दगी जनत सी महेसुस होती है
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चेहरे के रंग देखकर, दोस्त ना बनाना दोस्तों.. "तन" का काला चलेगा लेकिन "मन" का काला नहीं..?
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116
मुझे पसंद है शांत रहना, इसे मेरी 'कमजोरी' मत समझना ।
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72
मिजाज़ में थोड़ी सख़्ती भी होनी चाहिये साहब, लोग पी जाते अगर समन्दर खारा न होता !!"
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6
नमो नमो दुर्गे सुख करनी. नमो नमो अम्बे दुःख हरनी.!
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81
मुझे मरने का शौक तो नहीं है पर, तेरे इश्क़ से बेहतर मौत ही है..!
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28
वक्त के बदल जाने से इतनी तकलीफ नहीं होती, जितनी किसी अपने के बदल जाने से होती है |
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38
देख ली इस दुनिया की यारी बदल गए सब बारी बारी ! ?
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इश्क़ की पतंगे उड़ाना छोड़ दी हमने वरना, हर हसीना की छत पर हमारे ही धागे हुआ करते थे।?
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इस छोटी सी उम्र में कितना कुछ लिख दिया मैंने, उम्रें लग जायेंगी, तुम्हे मुझे पूरा पढ़ने में।
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