बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
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सुना है मतलब बहुत वजनदार होता है, निकल जाने के बाद हर रिश्ते हल्का कर देता है
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उनकी जब मर्जी होती है तब हमसे बात करते हैं, और हम पागल पूरा दिन उनकी मर्जी का इंतज़ार करते हैं|
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जिगर वालों को डर से कोई वास्ता नहीं होता, हम वहाँ भी कदम रखते हैं, जहाँ कोई रास्ता नहीं होता..!?
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ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही
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दुख में अक्सर जज्बात मर जाते हैं, मगर इंसान जीना सीख जाता है ✔️
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समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...
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परेशान करते थे मेरे सवाल तुमको.. तो बताओ पसंद आयी खामोशी मेरी....
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दिलो मे रहता हु, धड़कने थमा देता हु - मे इश्क हु - वजूद की धजिया उड़ा देता हु
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आज कल वो लोग भी कहते है कि हमारा तो नाम ही काफी है… जिनको गली में 2 लोग भी नही जानते है। ??
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मोहब्बत भी ठंड जैसी है, लग जाये तो बीमार कर देती है
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किसी के पैरो मे गिरकर कामयाबी पाने से बेहतर है अपने पैरो पर चलकर कुछ बनने की ठान लो |
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*दोस्त बेशक एक हो* *लेकिन ऐसा हो,* *जो अलफाज से ज्यादा* *खामोशी को समझें*
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शरीफों की शराफत और हमारा कमीनापन किसी को अच्छा नहीं लगता!! ??
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अगर किसी दिन तुम्हें रोना आए तो कॉल जरूर कर लेना, हंसाने की गारंटी तो नहीं लेता पर तेरे साथ जरूर रहूंगा
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झूठी शान के परिंदे ही ज्यादा फड़फड़ाते है, बाज़ की उड़ान में कभी आवाज नही होती।
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सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते
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जो इज्जत देगा उसी को इज्जत मिलेगी, हम हैसियत देखकर सर नहीं झुकाते ??
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टूटे हुए सपनो और छुटे हुए अपनों ने मार दिया, वरना ख़ुशी खुद हमसे मुस्कुराना सिखने आया करती थी |?
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उन दिनों को याद करके हम मुस्कुराने लगते है,अपने दोस्तों की दोस्ती पे इतराने लगते है।
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चाहत उसी से रखो जो बिन इबादत के मिल जाए, जो नसीब में नहीं वो मोहब्बत बेकार है |
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एक अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा जहाँ लोग मिलते कम, झाँकते ज्यादा है..!
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हमारे पास तो बस #तेरी यादें है,ज़िन्दगी तो उसे #मुबारक हो जिसके पास तुम हो |??
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“अकड़ उतनी ही दिखाना जितनी तेरी औकात हो,,!!” ?
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यूँ पल-पल न मरते, न रातों में रोते, काश हम मोहब्बत से अनजान होते!!
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दुनिया खामोशी भी सुनती है, लेकिन पहले दहशत मचानी पड़ती है |?
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कोई नहीं था दिल में उसके सिवा, फिर भी उसने तोड़ कर देखा.
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कैसे भरोसा कंरू गैरो के प्यार पर, यहां अपने ही मज़े लेते है अपनों की हार पर|??
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बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में...इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं...!
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नींद चुराने वाले पूछते हैं सोते क्यों नहीं, इतनी ही फ़िक्र है तो फिर हमारे होते क्यों नहीं |
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