मै तब भी अकेला नहीं था, नहीं आज भी हु, तब यारो का काफिला था, आज यादो का कांरवा है
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प्रेम हो तो राधा कृष्ण जैसा भले ही साथ ना हुए मगर नाम आज भी साथ लिया जाता है..!!
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उसकी मोहबत पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन ,दिल करता है के उम्र भर उसका इंतज़ार करू !
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"खैरात में मिली ख़ुशी हमें पसंद नहीं, हम अपने ग़मो में भी रहते हैं नवाबो की तरह !!"
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हम ? भी शरीफों की गिनती में आते हैं, अगर कोई उंगली ? ना करें तो!
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फर्क तो अपनी अपनी सोच में है, वरना दोस्ती भी मोहब्बत से कम नहीं होती !!??
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सुना था मोहब्बत मिलती है, मोहब्बत के बदले || हमारी बारी आई तो, रिवाज ही बदल गया ||??
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18
दिल तक पहुँचने का रास्ता, वफ़ा के समंदर से होकर गुजरता है। हर लहर पे नाव बदलने वाले, मंजिल तक नही पहुँचा करते…
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साथ छोडने वालो को तो बस.. ऐक बहाना चाहिए। वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाझे तक साथ नही छोडते।
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धोखा देने के लिए शुक्रिया तेरा ! तुम न मिलती तो दुनिया की समझ न आती ?
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दुरिया मायने नहीं रखती, जब दिल एक दुसरे के वफादार हो।
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मुझे फरक नहीं पड़ता,,,,अब क़समें खाओ या जहर..!!
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"गजब की दिवानगी है तुम्हारी मोहब्बत में, तुम हमारे नहीं फिर भी हम तुम्हारे हो गये"
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फितरत तो कुछ यूं भी है इन्सान की बारिश ख़त्म हो जाए तो छतरी भी बोझ लगती है ✔️
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नफ़रत की एक बात अच्छी लगी मुझे, ये मोहब्बत की तरह झूठी नहीं है साहब !!?❤️
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जिनका इरादा हो साथ चलने का वो बहाने नहीं रास्ते ढूंढते है |✔️
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सच्चे प्यार के लिए दूरियां मायने नहीं रखतीं
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*हर किसी को सफ़ाई मत दीजिये* *आप इंसान हैं, डिटर्जेंट नहीं...*
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मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है..
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जंग भीड़ से नहीं, जिगर से जीती जाती है.?
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तकलीफ ये नहीं कि मोहब्बत हो गई थी दर्द ये है कि अब वो भुलाई नहीं जा रही |
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मिलना तेरा मिलना मेरा …मिलना था क़िस्मत में लिखा…
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छोड़ दिया हमने अब उन गलियों से गुजरना, जहाँ हमें देखने के लिए कभी वो इंतज़ार किया करती थी।
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प्यार वो नहीं जो कोई कर रहा है प्यार वो है जो कोई निभा रहा है ?
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खुश तो वो रहते हैं जो जिस्मो से खेलते हैं , रूह से मोहब्बत करने वालो को अक्सर तड़पते देखा है
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“मशहूर होने का शोक नहीं है, लेकिन क्या करे लोग नाम से ही पहचान लेते है।” ??
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12
शाम उतरने लगी है खिड़की पर, बेसबर आँखों को चाँद का इंतजार है..!
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थोड़ा और बताओ ना मुझे मेरे बारे में, सुना है बहुत अच्छे से जानते हो तुम मुझे ।।?
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कितना भी समेट लो.. हाथों से फिसलता ज़रूर है.. ये वक्त है साहब.. बदलता ज़रूर है..!!❤️
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यक़ीं न आए तो इक बार पूछ कर देखो जो हँस रहा है वो ज़ख़्मों से चूर निकलेगा...
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