बिछड़ कर फिर मिलेंगे यकींन कितना था, था तो ख्वाब, मगर हसीन कितना था |
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काश ! वो सुबह नींद से जागे तो मुझसे लड़ने आए, कि तुम होते कौन हो मेरे ख़्वाबों में आने वाले
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कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है,बस कोई दिल से नहीं मिलता
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इश्क़ में इतनी बेपरवाहियाँ भी ठीक नही हैं , बात हम नही करते ...तो तकल्लुफ तुम भी नही करते...!!
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सब छोड़ते ही जा रहे हैं मुझको ऐ ज़िन्दगी, तुझे भी इजाज़त है, जा जा के ऐश कर |
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"तू मोहब्बत है मेरी इसलिए तो दूर है, अगर ज़िद्द होती तो शाम तक बाहों में होती !!"
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हम तो झुके थे तेरे इश्क में तूने, तो गिरा हुआ ही समझ लिया |
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सिर्फ जंगल ही छोडा है याद रखना शेर तो हम आज भी है |
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इतना कहाँ मशरूफ हो गए हो तुम.. अब दिल दुखाने भी नहीं आते ?
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अच्छी लगती है ये खामोशियाँ भी अब हर किसी को जवाब देने का सिलसिला ख़त्म हो गया।
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दिल पर लग जाती है उन्हें अक्सर हमारी बातें , जो कहते थे तुम कुछ भी बोलो बुरा नहीं लगता...
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राज तो हमारा हर जगह पे है, पसंद करने वालों के दिल में और नापसंद करने वालों के दिमाग में |?
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तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
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इतना दर्द तो मौत भी नही देती, जितनी दर्द तेरी ख़ामोशी दे रही है।
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लोग कहते है खुश रहो...काश रहने भी देते ?
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अजीब खेल है ये मोहब्बत का, किसी को हम न मिले, कोई हमें ना मिला।??
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पहली सिगरेट हो या पहली बीयर कोई भी खरीदकर नहीं पीता … हमेशा कोई न कोई दानवीर हाथ में देकर कहता है – “पी ले, कुछ नहीं होगा
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मेरी ज़िन्दगी में तुम शामिल हो एसे, मंदिर के दरवाजे पर मन्नत के धागे हो जैसे..!❤️❤️
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शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है
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माफ़ी चाहता हू, तेरा गुनहगार हू ए दिल, तुझे उसके हवाले किया जिसे तेरी कदर नहीं.?
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जुदा होने का शौक भी पूरा कर लेना जनाब, लगता है तुझे हम ज़िंदा अच्छे नहीं लगते!?
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खुश तो वो रहते हैं जो जिस्मो से खेलते हैं , रूह से मोहब्बत करने वालो को अक्सर तड़पते देखा है
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दिल के मरीज़ हॉस्पीटल से ज्यादा, ऑनलाइन मिलते हैं.??
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सजा तो बहुत दी है ज़िंदगी ने पर कसूर क्या था वो नहीं बताया..?
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नफ़रत , इश्क़ , मोहब्बत जो भी हो हक़ से दीजिए , वरना रहने दीजिए !!??
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हम जो सोचते हैं , वो बन जाते हैं
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Apno ko jab apne kho dete hain tanhaiyon me aksar wo ro dete hain, kyu palkon par rakhte hain log unko,jo in palkon ko hamsha aansuon se bhigo dete hain.
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कर्जदार हूं उस हकीम का, जिसनें दवा में तेरा दीदार लिखा |
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आज फिर देखा किसीने मोहब्ब्त भरी निगाहों ? से.. एक बार फिर तेरी ख़ातिर हम ने अपनी नजरे ? झुका ली..!!
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जिस चीज़ का तुम्हे खौफ है, उस चीज़ का हमे शोक है |?
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