अपनी औकात में रहना सीख बेटा. वर्ना जो हमारी आँखों में खटकते है, वो श्मशान में भटकते है.??
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127
वो मेरी गलतियाँ निकालते है, क्योंकि ये मुझे हराने से आसान है ।?
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33
कुछ चीजे पैसों ? से नही मिलती और मुझे उन्ही चीजों का शौक हैं.?
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62
“अकड़ उतनी ही दिखाना जितनी तेरी औकात हो,,!!” ?
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19
चाय जैसी उबल रही है ज़िंदगी मगर, हम भी हर घूँट का आनंद शौक़ से लेंगे☕
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36
वाकिये तो अनगिनत है जिंदगी के, समझ नहीं आता कि किताब लिखू या हिसाब लिखूँ !?
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39
जब शिकार का वक़्त होगा, तब हम जंगल जरुर आयेगें! ?
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22
बेमतलब की ज़िन्दगी का सिलसिला अब ख़त्म, अब जिस तरह की दुनिया उस तरह के हम.?
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95
शक नही पूरा यकीन है, कोई किसी का नही होता!?
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44
जलो ? मत हमे देख कर, वरना राख हो जाओगे |
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173
यहाँ किसकी मज़ाल है जो छेड़े दिलेर को, गर्दिश में तो कुत्ते भी घेर लेते हैं शेर को..!!?
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36
वाक़िये ? तो अनगिनत हैं #ज़िंदगी के, समझ नहीं आता, कि किताब लिखूँ या हिसाब ? लिखूँ..
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मिट्टी के बने है साहब, घमंड हमे जचता नहीं ?
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दुश्मन चाहे कितने भी हो पर दोगला यार एक भी न हो |?
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इश्क़ की पतंगे उड़ाना छोड़ दी हमने वरना, हर हसीना की छत पर हमारे ही धागे हुआ करते थे।?
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87
माना की तू शेर है पर ज्यादा उछल मत, हम भी शिकारी हैं ठोक देंगे..!!?
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69
"चुप हूँ तो खुद को शहनशाह मत समझ बोलने पर आया तो तुझे तेरी औकात दिखा दूंगा..!
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24
उम्मीद जिंदा रखिए साहेब, आज हँसने वाले कल तालिया भी बजाएंगे..!❤️?
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121
मैं जो हूँ सो हूँ, लोगो की सोच से मुझे घण्टा भी फर्क नही पड़ता..!??
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107
टेक्नोलॉजी ? की क्या बात करते हो जनाब,आजकल मोहब्बत भी ऑनलाइन ? हो जाती है..
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92
हम ऊंची आवाज़ पसंद नहीं करते, ख़ामोश रहो या औकात में ??
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56
पैदा तो हम भी शरीफ हुए थे, पर शराफत से अपनी कभी बनी ही नहीं?
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32
मुझे समझना इतना आसान नहीं.. गहरा समुंदर हूं खुला आसमान नहीं...?
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129
मैं अपने खिलाफ बाते अक्सर ख़ामोशी से सुनता हूं, जवाब देने का काम मैंने वक़्त को दे रखा है |?
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158
मुझको क्या डराओगे मौत से मैं तो पैदा ही क़ातिलों की गली में हुआ हूँ। ?
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15
हमे खो दोगे तो पछताओगे बहुत, ये आखरी गलती जरा सोच समझकर करना…?
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39
मत कोशिश करो मुझ जैसा बनने की, क्योंकि शेर पैदा होते हैं बनाए नहीं जाते !!"
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9
जीने का असली मजा तो तब है दोस्तों जब दुश्मन भी तुमसे हाथ मिलाने को बेताब रहे..! ? ?
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13
सिकंदर तो हम अपनी मर्जी से है, पर हम दुनिया नहीं दिल जितने आये हे।❤️?
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57
मेरी सोच और मेरी पहचान, दोनों ही तेरे औकात से बाहर है!
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