रेल की खिड़कीयां तो खोल दी थी हमने मगर रात थी जब तुम्हारा शहर आया था....!
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पूछा जो हमनें किसी और के होने लगे हो क्या, वो मुस्कुराकर बोले पहले तुम्हारे थे क्या.
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थम के रह जाती है ज़िंदगी जब जम के बरसती है पुरानी यादें
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वो मेरा नहीं फिर भी मेरा है, ये कैसी उम्मीद ने मुझे घेरा है |❤️
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कुछ पल निकाल लिया करो मेरे लिए भी, दिल बहुत उदास रहता है जब तुमसे बात नहीं होती
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बड़े बेताब थे वो मोहब्बत करने को हमसे, जब मैंने भी कर ली तो उन्होने शौंक बदल दिया.
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बेशक जो दुःख दे उसे छोड़ दो ..... मगर जिसे छोड दो उसे दुःख मत दो ...
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ज़िन्दगी रोज मुझसे कहती है.. तूने क्या हाल कर दिया मेरा..
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जब तक खुद पर ना गुजरे, एहसास और जज़्बात मजाक लगते है...!
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जिंदगी में कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो कभी नहीं भरते.. बस इंसान उन्हें छिपाने का हुनर सीख जाता है..??
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जिस जगह से कोई लौटकर नहीं आता, आज ना जाने क्यों वहां जाने का दिल कर रहा है...??
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तुम्हारे लिए मिट जाने का इरादा था, तुम खुद ही मिटा दोगे सोचा ना था.
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ज़िन्दगी में जो लोग सबसे खास होते हैं, वह कुछ पल के लिए ही पास होते हैं |?
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एक हलकी सी मुस्कुराहट से शुरू हुई मोहब्बत, हज़ार आँसू बहाने पर भी खत्म नहीं होती ??
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यूँ ना छोड़ कर जाया करो बार-बार,अगर मैं रूठ गया तो,मेरी एक झलक को भी तरसोगी |
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गुरुर” किस बात का करू मरने के बाद मेरे "अपने" ही, मुझे छूने के बाद हाथ" धोएंगे...!??
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एक तेरी ख़ामोशी जला देती है इस पागल दिल को, बाकी तो सब बातें अच्छी हैं तेरी तस्वीर में..!!
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बिन धागे की सुई सी बन गई है ये ज़िंदगी, सिलती कुछ नहीं, बस चुभती चली जा रही है…?
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काफी मिलती जुलती थी हमारी आदते ,न उसने पुकारा न मेने पलट के देखा ?
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मसला पाने का होता तो ख़ुदा से छीन लेता ख़्वाहिश तुझे चाहने की है, उम्र भर चलेगी |
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ये बार बार छोड़ने का शौक तुम्हें ही था, हमनें तो पलके तक भिगोई थीं तुम्हें रोकने के खातिर.
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उनकी नफरत बता रही है, हमारी मोहब्बत गज़ब की थी ?
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जब रिश्तों में ग़लतफहमी आ जाये तो, सच्चा प्यार भी झूठा लगने लगता है.
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हमने तो अल्फांजों में अपना दर्द सुनाया था उन्हें, मगर वो शायरी समझ कर, मुस्कुरा कर चले गए |
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मिले तो हजारो लोग थे जिंदगी में, मगर वो सबसे अलग था जो किस्मत में नही था।
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तू इश्क?की दूसरी निशानी देदे मुझको,आँसू?तो रोज गिर के सूख जाते हैं..!!
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क़ोई ज़ुदा हो तो ऐसे ना हो, कि लौटने का भ्रम रह जाये
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सोचा ही नहीं था..जिन्दगी में ऐसे भी फ़साने होगें, रोना भी जरूरी होगा..और आँसू भी छुपाने होगें.!
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अधूरी कहानी पर खामोश लबों का पहरा है, चोट रूह की है इसलिये दर्द जरा गहरा है❤️?
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अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो
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