उस किताब ? सा हूं मैं, जिसे तुमने कई बार पढ़ा ? लेकिन कभी समझा नहीं।
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47
टूट सा गया है मेरी चाहत का वजूद ,अब कोई अच्छा भी लगे तो हम इज़हार नहीं करते?
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46
एक घुटन सी होती है दिल में जब कोई दिल में तो रहता है पर साथ नहीं.!
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तूने कैसे थामा होगा हाथ उसका, तेरी हथेली को भी आदत मेरी थी। ??
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बेशक जो दुःख दे उसे छोड़ दो ..... मगर जिसे छोड दो उसे दुःख मत दो ...
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40
तू भी आईने की तरह बेवफा निकला, जो सामने आया उसी का हो गया ❤️
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20
कुछ लोग जब बोल नहीं पाते , बस रो देते है ...
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58
मायने खो देते हैं वो जवाब, जो वक्त पर नहीं मिलते !!
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40
वो भी फुरसत में बैठकर �..कसर सोचती तो होगीं.. कि कितनी सीद्दत से मोहब्बत करता था कोई....?
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29
सिर्फ़ मोहब्बत की होती तो भुला देते उन्हें, ये पागल दिल तो इबादत कर बैठा ?
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एक आखिरी मुलाक़ात की ख्वाहिश थी पर अलविदा भी वो फ़ोन पर ही कह गए....?
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67
बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह, जिन्हें हद से ज्यादा वक़्त दिया जाता है..?
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हमने इज़हार किया काफ़ी इंतजार के बाद, हमें इंतजार ही मिला, इज़हार के बाद |?
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17
मोहब्बत के मारे लोग फिर कहा मिलते है, ये मुरझाए हुए गुलाब ? है, जो सिर्फ़ किताबों ? में मिलते है..
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21
हम तो हँसते हैं दूसरों को हँसाने के लिए वरना ज़ख्म तो इतने हैं कि ठीक से रोया भी नहीं जाता..
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20
ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
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17
इश्क का धंधा ही बंद कर दिया साहेब, मुनाफे में जेब जले, और घाटे में दिल..!!??
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18
इतना क्यों सिखाए जा रही हो जिंदगी, हमें कौनसी सदियाँ गुजारनी है यहाँ.
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8
धीरे धीरे तो बस नज़दीकियां ही बढ़ती है, रिश्ते तो अक्सर एकदम से ही टूटा करते है.
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89
जब छोटे थे तो बातें भूल जाते थे तो सब कहते थे याद रखना सीखो, अब जब बड़े हो गए हैं तो हर बात याद रहती है तो सब कहते हैं भूलना सीखो.
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132
अगर आप ख़ुश हो तो ये दुनियाँ रंगीन लगती है...वर्ना नम आँखों से तो आईना भी धुंधला नजर आता है।
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20
मोहब्बत तो सिर्फ मुझे हुई थी, उसे तो तरस आया था मुझ पर।
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11
वो न ही मिलती तो अच्छा था, बेकार में मोहब्बत से नफरत हो गई..! ❤️
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हमने तो अल्फ़ाजों में अपना दर्द सुनाया था उन्हें, मगर वो शायरी समझ कर, मुस्कुरा कर चले गए।
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12
"तुम" याद आओगे यकीन था मुझे, इतना आओगे अंदाजा नहीं था...!
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मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की..कोई आप सा तो हो, लेकिन किसी और का ना हो..
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एक हलकी सी मुस्कुराहट से शुरू हुई मोहब्बत, हज़ार आँसू बहाने पर भी खत्म नहीं होती ??
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उम्मीद तो उसी दिन छोड़ दी, जब तुम्हें उस अजनबी के करीब देखा था। ?
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क्यों गरीब समझते हैं हमें ये जहां वाले, हजारों दर्द की दौलत से मालामाल हैं हम…...!
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सजा तो बहुत दी है ज़िंदगी ने पर कसूर क्या था वो नहीं बताया..?
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